छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा जगत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष (चौथे सेमेस्टर) की ‘कीट विज्ञान’ (एंटोमोलॉजी) परीक्षा का प्रश्नपत्र शुरू होने से ठीक पहले लीक हो गया। 20 अगस्त को आयोजित इस परीक्षा का पर्चा दो घंटे पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परीक्षा तत्काल रद्द कर दी गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दुर्ग के एक निजी कॉलेज के प्रोफेसर सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
परीक्षा से 2 घंटे पहले वॉट्सऐप पर वायरल हुआ पर्चा
प्रदेश के 27 कृषि महाविद्यालयों के लगभग 1,200 छात्र इस परीक्षा में शामिल होने वाले थे। प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित भेजे जा चुके थे, लेकिन परीक्षा शुरू होने से महज दो घंटे पहले पूरा पर्चा वॉट्सऐप ग्रुपों में प्रसारित होने लगा। कवर्धा और बिलासपुर कॉलेज के अधिष्ठाता द्वारा ई-मेल के जरिए शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा रद्द करते हुए रायपुर के तेलीबांधा थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
5 जिलों में छापेमारी: प्रोफेसर निकला मुख्य आरोपी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और साइबर सेल ने रायपुर, दुर्ग, कवर्धा, राजनांदगांव और बिलासपुर में ताबड़तोड़ छापेमारी की:जांच में सामने आया कि पर्चा दुर्ग स्थित एक निजी कॉलेज के प्रोफेसर के जरिए लीक हुआ। वहां से यह कवर्धा के छात्रों तक पहुंचा और फिर वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए तेजी से फैल गया। पुलिस ने सभी 6 गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त कर लिए हैं ताकि मुख्य स्रोत (Origin Point) और पूरे सिंडिकेट का पता लगाया जा सके।
विश्वविद्यालय ने बनाई 5 सदस्यीय जांच कमेटी
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पूरे मामले की आंतरिक जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। यह समिति सोशल मीडिया पर वायरल पर्चे और मूल प्रश्नपत्र का अक्षरशः मिलान करेगी और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
“प्रदेश में परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध सबसे कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।”
— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
शिक्षक साझा मंच की मांगों को कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन का प्रांतीय समर्थन


