विशेष ब्यूरो।

देश के खनिज मानचित्र पर एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ी खोज सामने आई है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में एल्युमिनियम सिलिकेट अयस्क (एंडालुसाइट) का एक विशाल भंडार मिला है, जिसे देश का अब तक का सबसे बड़ा एंडालुसाइट भंडार माना जा रहा है। भारतीय खान ब्यूरो (IBM) की रिपोर्ट के अनुसार, कुल राष्ट्रीय अनुमानित भंडार का 91 प्रतिशत हिस्सा यानी 114.25 मिलियन टन अकेले सोनभद्र में होने का अनुमान है। इस बड़ी खोज के बीच छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और रायपुर जिलों के लिए भी बड़े संकेत मिले हैं, जहाँ एंडालुसाइट अयस्क की मौजूदगी की पुष्टि हुई है।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और रायपुर में मिले बड़े संकेत, बभनी बेल्ट का भी जुड़ाव

भारतीय खान ब्यूरो और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की रिपोर्ट के अनुसार, इस खनिज के वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर सर्वेक्षण के दौरान छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और रायपुर जिलों में भी एंडालुसाइट के पुख्ता संकेत मिले हैं। इसके साथ ही, सोनभद्र की दक्षिणी सीमा पर छत्तीसगढ़ राज्य से ठीक सटे बभनी-बीजपुर क्षेत्र में एक और बहुमूल्य एल्युमिनो सिलिकेट खनिज, ‘सिलिमेनाइट’ का भी विशाल भंडार मिला है।

यह पूरी सिलिमेनाइट बेल्ट छत्तीसगढ़ की सीमा से लगी हुई है, जो 600 मीटर से अधिक चौड़ी है और पूर्व में आसनडीह से लेकर पश्चिम में बाजिया तक 6 किलोमीटर से अधिक दूरी में फैली है। इस बेल्ट के भीतर औसतन 25 प्रतिशत शुद्धता वाला लगभग 10 मिलियन टन सिलिमेनाइट भंडार होने का अनुमान है, जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ और उससे सटे सीमावर्ती इलाकों में बड़े औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

छह नए ब्लॉक चिन्हित, 24 से 26 प्रतिशत आंका गया औसत ग्रेड

जीएसआई (GSI) द्वारा झारखंड से सटे पूरे कोन-विंढमगंज क्षेत्र के लगभग 48 वर्ग किलोमीटर इलाके में चार चरणों में किए गए विस्तृत सर्वेक्षण के बाद उत्तर प्रदेश और झारखंड की सीमा पर एंडालुसाइट के छह फ्री होल्ड डिपॉजिट (ब्लॉक) चिन्हित किए गए हैं।

  • 91% भंडार (सोनभद्र): सलईडीह-हरवरिया और फुलवार समेत पांच ब्लॉक में 114.25 मिलियन टन भंडार का अनुमान है।

  • 9% भंडार (झारखंड): गढ़वा जिले के नगर-उंटारी क्षेत्र में 11.8 मिलियन टन भंडार मिला है।

  • औसत ग्रेड: खोजे गए इस एंडालुसाइट अयस्क का औसत ग्रेड 24 से 26 प्रतिशत आंका गया है।

  • अन्य राज्य: छत्तीसगढ़ और यूपी के अलावा ओडिशा के मलकानगिरी, राजस्थान के झुंझुनू, नागौर व टोंक में भी इसके संकेत पाए गए हैं।

औद्योगिक जगत में क्यों है इस खनिज की भारी मांग?

एंडालुसाइट और सिलिमेनाइट दोनों ही व्यावसायिक दृष्टि से बेहद बेशकीमती खनिज हैं। वर्तमान में ब्राजील और श्रीलंका एंडालुसाइट के प्रमुख वैश्विक उत्पादक देश हैं, लेकिन भारत में इस खोज के बाद देश की निर्भरता बाहरी देशों पर कम होगी।

  • उच्च तापमान भट्टियों में उपयोग: इसका सबसे प्रमुख औद्योगिक उपयोग इस्पात (Steel), सीमेंट और कांच उद्योगों में उच्च तापमान वाली भट्टियों की इनर लाइनिंग के लिए अग्निरोधी (Refractory) ईंटें और ब्लॉक बनाने में होता है, क्योंकि यह बिना पिघले अत्यधिक तापमान और रासायनिक दबाव झेल सकता है।

  • ऑटोमोबाइल और सिरेमिक: इसका उपयोग ऑटोमोबाइल के स्पार्क प्लग, उच्च गुणवत्ता वाले सिरेमिक उत्पाद, इंसुलेटर और पेट्रोकेमिकल रिफाइनरियों में बड़े पैमाने पर होता है।

  • रत्न के रूप में: पारदर्शी और रंगीन एंडालुसाइट को तराश कर बेहद आकर्षक और कीमती रत्न (Gemstones) भी तैयार किए जाते हैं।

विशेषज्ञों की राय:

“सोनभद्र और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में एंडालुसाइट और सिलिमेनाइट का इतना बड़ा भंडार मिलना व्यावसायिक दृष्टि से गेम-चेंजर है। विस्तृत सर्वेक्षण के बाद जब यहाँ खनन (Mining) शुरू होगा, तो इस पूरे मध्य-भारत क्षेत्र में भारी औद्योगिक निवेश आएगा और रोजगार की असीम संभावनाएं विकसित होंगी।”

प्रो. विभूति राय, भू-विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय।

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