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नई दिल्ली:
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुई हिंसा और प्रदर्शन के मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदर्शन के समर्थन में सोशल मीडिया पर डिजिटल कैंपेन चलाने वाले कई बड़े इंफ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स और पूर्व पत्रकारों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। इसके साथ ही डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और कंटेंट प्रमोशन से जुड़ी तीन बड़ी कंपनियों के दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के आदेश पर इस पूरे मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंप दी गई है।
जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स वाले कई इंफ्ल्यूएंसर्स को प्रदर्शन के पक्ष में माहौल बनाने के लिए प्रति पोस्ट 40 हजार से 80 हजार रुपये तक का भुगतान किया गया था। यह भुगतान डिजिटल मार्केटिंग और प्रमोशन से जुड़ी तीन कंपनियों के माध्यम से किया गया था। फिलहाल एजेंसियां प्रदर्शन के दौरान चलाए गए डिजिटल अभियानों, वित्तीय लेनदेन और सभी पक्षों के बीच संभावित समन्वय की गहनता से पड़ताल कर रही हैं। इसके साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड्स और भुगतान के माध्यमों का भी मिलान किया जा रहा है।
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हिंसा से जुड़े मामलों में संसद मार्ग थाने के थानाध्यक्ष इंद्रजीत की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम से जुड़ी 15 गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें दंगा भड़काने, आपराधिक साजिश रचने, हत्या का प्रयास करने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने और हथियार छीनने जैसे बेहद गंभीर आरोप शामिल किए गए हैं।
एफआईआर के मुताबिक, 20 जुलाई की रात इस हिंसा की सुनियोजित साजिश रची गई थी। दावा किया गया है कि सीजेपी प्रमुख के संसद मार्च के आह्वान पर रात में लगभग 10 से 11 हजार लोग जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए थे। रात करीब 10:11 बजे आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा लोगों को संबोधित किए जाने के बाद भीड़ आक्रामक हो गई। भीड़ में मौजूद असामाजिक तत्वों ने प्रदर्शनकारियों को उकसाते हुए सुरक्षाकर्मियों पर पत्थरों व डंडों से हमला करने के लिए भड़काया, जिसके बाद हुए पथराव में कई वरिष्ठ अधिकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस दौरान उपद्रवियों ने हवलदार मुकुंद पर हमला कर उनका हथियार छीन लिया और अन्य पुलिसकर्मियों से भी हथियार छीनने की कोशिश की गई।
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