नई दिल्ली: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। इस व्यवस्था के तहत देश भर में अपराधों की रोकथाम, उनकी जांच, आरोपियों की पहचान और अभियोजन की प्राथमिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEA) की होती है।
यौन अपराधों और विशेष रूप से बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (POCSO) से जुड़े मामलों की प्रभावी जांच के लिए गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने वर्ष 2018 में ‘राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस’ (NDSO) की शुरुआत की थी। यह एक केंद्रीयकृत डेटाबेस है, जो पुलिस और अन्य एजेंसियों को बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों की पहचान करने और उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि की पुष्टि करने में मदद करता है। गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस डेटाबेस तक पहुंच केवल अधिकृत कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक ही सीमित रखी गई है, ताकि इसका उपयोग केवल आधिकारिक जांच के लिए ही हो सके।
इसके अलावा, कर्मचारियों और कर्मियों के प्रारंभिक सत्यापन को आसान बनाने के लिए ‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड जांच’ (NCRC) पोर्टल विकसित किया गया है। यह पोर्टल CCTNS और अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS) के डेटाबेस का उपयोग करके शुरुआती आपराधिक रिकॉर्ड की जांच करता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने CCTNS के माध्यम से नागरिक पोर्टल भी शुरू किए हैं, जहाँ से शैक्षणिक संस्थान, बाल देखभाल गृह और अन्य निजी या सरकारी संगठन कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
साइबर अपराधों और ऑनलाइन बाल यौन शोषण की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए गृह मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ के साथ-साथ हेल्पलाइन नंबर 1930 भी जारी किया है, जिसके माध्यम से नागरिक साइबर अपराधों की त्वरित रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं। लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में गृह राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।



