बलरामपुर में धनंजय ज्वेलर्स चोरी के आरोपी उमेश सिंह की पुलिस अभिरक्षा में मौत का मामला अब उलझ गया है। स्वजन ने सीधे तौर पर पुलिस पर मारपीट और हत्या का गंभीर आरोप लगाया है और न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पोस्टमार्टम के बावजूद शव ले जाने से इनकार कर दिया है। यह गंभीर प्रकरण बलरामपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़े कर रहा है। मृतक का शव अभी भी जिला अस्पताल परिसर के वाहन में रखा है और परिवार तत्काल जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की मांग पर डटा हुआ है। पुलिस जहां बीमारी को मौत का कारण बता रही है, वहीं स्वजन का आरोप है कि अवैध हिरासत के दौरान पिटाई की गई।

पुलिस पिटाई या सिकलसेल? मौत के कारणों पर बड़ा विवाद

मृतक उमेश सिंह, जो सीतापुर थाना क्षेत्र के नकना गांव का निवासी था, को धनंजय ज्वेलर्स चोरी के आरोप में अन्य आठ लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था। पुलिस उमेश को चोरी गए जेवरों की बरामदगी के लिए लेकर निकली थी। स्वजन का आरोप है कि 7 नवंबर को पकड़े जाने के बाद से ही उमेश के साथ मारपीट की जा रही थी और उन्हें मिलने भी नहीं दिया गया। 9 नवंबर को अस्पताल में मृत्यु की सूचना मिलने के बाद यह विवाद खड़ा हो गया।

दूसरी ओर, बलरामपुर पुलिस ने मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उमेश सिंह को सिकलसेल (Sickle Cell) की गंभीर बीमारी थी और वह पिछले एक साल में 10 बार अस्पताल में भर्ती हुआ था। पुलिस के अनुसार, तबीयत खराब होने पर उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हुई। हालांकि, स्वजन पुलिस के इस बीमारी के दावे को मानने को तैयार नहीं हैं।

एक सप्ताह नहीं, तत्काल कार्रवाई की मांग पर डटे परिजन

पुलिस अभिरक्षा में युवक की मौत के बाद, स्वजन ने अस्पताल परिसर में ही रात गुजारी है और उनका रुख स्पष्ट है: जब तक दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे शव नहीं लेंगे। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें एक सप्ताह में जांच पूरी करने और जांच के आधार पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

लेकिन स्वजन इस आश्वासन को मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि यह एक गंभीर मामला है और इसमें तत्काल जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए। रविवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पंचनामा और पोस्टमार्टम हो चुका है, लेकिन शव अभी भी पुलिस वाहन में रखा है, जिससे जिला अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

विधायक रामकुमार टोप्पो ने दिया निष्पक्ष जांच का आश्वासन

इस संवेदनशील मामले में सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने हस्तक्षेप किया है। विधायक ने मृतक के स्वजन से मुलाकात की और उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। विधायक ने अपने बयान में कहा है कि “अगर कहीं भी चूक हुई है, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की है और पोस्टमार्टम न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कराए जाने का आग्रह किया था। विधायक के आश्वासन के बावजूद, स्वजन अभी भी तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। यह प्रकरण बलरामपुर पुलिस अभिरक्षा की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।

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