“पाँच स्तंभ, एक लक्ष्य: विकसित भारत और नेट जीरो के लिए नीति आयोग का मास्टर प्लान।”
रायपुर, फरवरी 2026
छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ ने अपनी वर्षों पुरानी मांगों के समाधान के लिए सरकार से कई दौर की बातचीत, ज्ञापन और निवेदन किए, लेकिन ठोस परिणाम नहीं मिलने पर अब महासंघ ने फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय ले लिया है। इस फैसले के साथ ही विकसित भारत–गारंटी फ़ॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (वीबी–जी राम जी) का भविष्य भी फिलहाल अधर में लटक गया है, क्योंकि कर्मचारी महासंघ का कहना है कि अपनी मांगों के पूर्ण होने पर ही वे इस योजना को फील्ड में उतारेंगे।
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वर्षों से लंबित मांगों पर नहीं हुई कार्रवाई
महासंघ ने उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री विजय शर्मा, प्रशासनिक अधिकारियों और शासन को दर्जनों बार ज्ञापन सौंपकर—नियमितीकरण, ग्राम रोजगार सहायकों का ग्रेड पे निर्धारण, 18 माह से लंबित मानव संसाधन नीति लागू करने की मांग उठाई।
मनरेगा में 20 वर्षों से सेवा दे रहे हजारों कर्मचारी अब भी सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। सरकार बनने के बाद इन मांगों पर विचार हेतु कमेटी तो बनाई गई, लेकिन 15 दिन में रिपोर्ट देने वाली कमेटी की प्रक्रिया दो वर्षों बाद भी आगे नहीं बढ़ सकी।
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केंद्रीय मंत्री का आश्वासन भी फाइलों में अटका
हाल ही में केंद्र के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह क्षत्री को आश्वासन दिया था कि राज्य शासन से बात कर अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने तथा उनकी सेवा सुनिश्चित करने पर पहल की जाएगी। इस जानकारी से उपमुख्यमंत्री को भी अवगत कराया गया था, लेकिन इसके बाद भी नीतिगत निर्णय नहीं हो सका।
एचआर पॉलिसी को लेकर भी निराशा
उपमुख्यमंत्री ने 18 माह से लंबित HR Policy पर तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिया था।
आयुक्त नरेगा ने भी 03 जनवरी 2026 को एक माह के भीतर नीति लागू कराने का आश्वासन दिया था।
लेकिन आज तक कोई सफलता नहीं मिलने पर कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
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रायपुर में प्रांतीय बैठक, हड़ताल का सर्वसम्मत निर्णय
रविवार को रायपुर के शादानी दरबार में आयोजित प्रांतीय बैठक में सभी जिलों व ब्लॉकों के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने एक सुर में फरवरी 2026 से राज्यभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया।
महासंघ ने स्पष्ट कहा कि —“यदि 15 दिनों के भीतर ग्राम रोजगार सहायकों का वेतनमान निर्धारण और नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती तथा सेवा व सामाजिक सुरक्षा को शामिल करते हुए HR Policy लागू नहीं की जाती, तो हम पूरे प्रदेश में काम बंद आंदोलन शुरू करेंगे।”
वीबी–जी राम जी योजना भी अटकी
कर्मचारियों ने यह भी तय किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक
विकसित भारत – गारंटी फ़ॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी–जी राम जी) को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया जाएगा। यह निर्णय प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को प्रभावित कर सकता है, जो मनरेगा पर निर्भर हैं। अब शासन की अगली कार्रवाई पर ही तय होगा कि विवाद सुलझेगा या प्रदेश एक बड़े प्रशासनिक संकट की ओर बढ़ेगा।
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