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नई दिल्ली: भारतीय न्यायपालिका को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक से लैस बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के तहत अब तक 660.36 करोड़ से अधिक अदालती अभिलेखों (पन्नों) का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य अब भारतीय अदालतों को पूरी तरह से ‘कागज-रहित’ (Paperless) और डिजिटल कोर्ट में बदलना है।

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न्यायिक प्रक्रियाओं में एआई (AI) का प्रवेश

न्याय प्रदान करने की गति को बढ़ाने के लिए अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का सहारा लिया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने आईआईटी मद्रास के सहयोग से एक विशेष ‘दोष पहचान मॉड्यूल’ विकसित किया है। इसके साथ ही, एनआईसी (NIC) द्वारा विकसित ‘लीगल रिसर्च एंड एनालिसिस असिस्टेंट’ (LEGRAA) जैसे उन्नत उपकरणों को भी न्यायिक कार्यप्रवाह में शामिल किया गया है। ये तकनीक न्यायाधीशों को केस से संबंधित दस्तावेजों के विश्लेषण और कानूनी शोध में बड़ी मदद प्रदान कर रही हैं।

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ई-सेवा केन्द्रों का विस्तार और लाइव स्ट्रीमिंग

आम नागरिकों और वकीलों की सुविधा के लिए देश भर में 2,444 ई-सेवा केन्द्र स्थापित किए गए हैं। डिजिटलीकरण का असर यह है कि अब तक लगभग 1.07 करोड़ मामले इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज (ई-फाइलिंग) किए गए हैं। पारदर्शिता को बढ़ाते हुए अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब उत्तराखंड, कोलकाता, तेलंगाना और मेघालय सहित कुल 11 उच्च न्यायालयों की कार्यवाही को ऑनलाइन देखा जा सकता है।

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आधुनिक सॉफ्टवेयर

अदालतों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अब तक 3.97 करोड़ से अधिक सुनवाई की हैं, जो डिजिटल सुनवाई की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। मामलों के बेहतर प्रबंधन के लिए केस इंफॉर्मेशन सिस्टम (CIS) को अब संस्करण 4.0 में अपग्रेड कर दिया गया है। इससे मामलों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता और गति आई है। वर्तमान में 18,735 से अधिक जिला और अधीनस्थ न्यायालयों का पूरी तरह कम्प्यूटरीकरण हो चुका है।

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तीसरे चरण का मेगा बजट

सरकार ने ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण (2023-2027) के लिए बजट को बढ़ाकर 7,210 करोड़ रुपये कर दिया है। इस चरण का मुख्य फोकस क्लाउड-आधारित डेटा भंडारण और सभी अदालतों, जेलों तथा अस्पतालों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का सर्वव्यापी विस्तार करना है। इस मिशन के पूरा होने के बाद, भारतीय न्याय प्रणाली पूरी तरह से डिजिटल और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो जाएगी।

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