नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश के दूरसंचार परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने राज्यसभा में इस डिजिटल प्रगति का पूरा ब्यौरा पेश किया, जिसमें 5G के विस्तार से लेकर उपभोक्ताओं की सुरक्षा तक के कड़े उपायों का उल्लेख किया गया है।
देश में हाई-स्पीड इंटरनेट की उपलब्धता अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रही है। वर्तमान में 5G सेवाएं देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो चुकी हैं, जो अब भारत के 99.9 प्रतिशत जिलों को कवर करती हैं। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, दूरसंचार कंपनियों ने देशभर में 5.18 लाख से अधिक 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशन (BTS) स्थापित किए हैं। सरकार की सक्रिय नीतियों और स्पेक्ट्रम नीलामी जैसे सुधारों का ही परिणाम है कि देश में मोबाइल ब्रॉडबैंड की औसत गति अक्टूबर 2025 तक बढ़कर 131.47 Mbps के प्रभावशाली स्तर पर पहुँच गई है।
ग्रामीण भारत को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में ‘भारतनेट’ परियोजना एक मील का पत्थर साबित हो रही है। अब तक 2,14,904 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए तैयार कर लिया गया है। इसके साथ ही, डिजिटल भारत निधि के माध्यम से सरकार ने उन दूरदराज के 31,515 गाँवों तक भी 4G मोबाइल कनेक्टिविटी पहुँचा दी है, जो पहले नेटवर्क से अछूते थे। इस कनेक्टिविटी ने न केवल भौगोलिक दूरियां कम की हैं, बल्कि सुदूर इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं तक पहुँच को भी मौलिक रूप से बदल दिया है।
उपभोक्ता सुरक्षा और सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। अवांछित स्पैम कॉल्स और एसएमएस की समस्या से निपटने के लिए दूरसंचार विभाग ने एक व्यापक अभियान चलाया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित समाधानों की मदद से हर दिन औसतन 7.5 करोड़ संदिग्ध स्पैम कॉल्स और संदेशों को ब्लॉक किया जा रहा है। इतना ही नहीं, नियमों का उल्लंघन करने वाले अपंजीकृत टेलीमार्केटर्स के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लगभग 21 लाख दूरसंचार कनेक्शन काट दिए गए हैं। अब वित्तीय सेवाओं के लिए विशेष ‘1600’ श्रेणी और प्रचार कॉल्स के लिए ‘140’ श्रेणी के नंबर अनिवार्य कर दिए गए हैं, ताकि नागरिक कॉल की पहचान कर सकें।
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प्रसारण और केबल सेवाओं में पारदर्शिता लाने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने फरवरी 2026 में नए विनियम जारी किए हैं। इन संशोधनों के तहत अब ऑडिट प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की गई है, जिससे वितरकों को हर साल 30 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी। छोटे वितरकों के लिए व्यापार में सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देते हुए 30,000 से कम ग्राहकों वाले ऑपरेटरों के लिए वार्षिक ऑडिट की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।
नवाचार के मोर्चे पर, सरकार ने भविष्य की चुनौतियों के लिए 100 ‘5G यूज़ केस लैब्स’ स्थापित की हैं, जहाँ AI और ब्लॉकचेन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ 5G के एकीकरण पर शोध किया जा रहा है। साथ ही, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी BSNL भी आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत अपनी 1 लाख साइट्स को स्वदेशी 4G तकनीक से अपग्रेड कर रही है, जिससे उसका ग्राहक आधार बढ़कर 9.28 करोड़ के पार पहुँच गया है। सरकार की ये बहुआयामी पहलें देश को एक सुरक्षित, किफायती और विश्वस्तरीय डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।
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