नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बदलती परिस्थितियों को देखते हुए भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के तनाव के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य और निर्बाध बनी हुई है। सरकार ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे घबराहट में आकर ईंधन की खरीदारी न करें और एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें।.
वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए फरवरी 2026 में लागू ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (DAC) आधारित व्यवस्था अब 53 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जिससे ईंधन की हेराफेरी पर प्रभावी लगाम लगी है।
ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार ने न केवल आपूर्ति बल्कि विकल्पों पर भी जोर दिया है। मार्च 2026 से अब तक 3.6 लाख से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन स्थापित किए जा चुके हैं और 3.9 लाख से अधिक नए पंजीकरण हुए हैं।
इसके साथ ही, प्रवासी श्रमिकों और छोटे उपभोक्ताओं के लिए 5 किलोग्राम वाले एफटीएल सिलेंडर की उपलब्धता आसान कर दी गई है, जिन्हें बिना पते के प्रमाण के खरीदा जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हुई वृद्धि के प्रभाव से आम जनता को बचाने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है, जबकि घरेलू बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीजल और एटीएफ के निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।
जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्यों को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत अब तक 50,000 से अधिक अवैध सिलेंडर जब्त किए जा चुके हैं।
समुद्री सुरक्षा और विदेश में रह रहे भारतीयों के हितों की रक्षा को लेकर भी सरकार पूरी तरह सक्रिय है। पत्तन और पोत परिवहन मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ कोई अप्रिय घटना दर्ज नहीं हुई है।
वर्तमान में पश्चिमी फारस की खाड़ी में 17 भारतीय जहाजों पर 460 नाविक मौजूद हैं, जिनकी निगरानी के लिए 24×7 कंट्रोल रूम काम कर रहा है। हवाई यातायात की स्थिति में भी लगातार सुधार हो रहा है और 28 फरवरी से अब तक 7,02,000 से अधिक यात्री सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान में फंसे 345 भारतीय मछुआरे भी कल स्वदेश लौट आए हैं।
विदेश मंत्रालय लगातार खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर नजर रख रहा है और दूतावासों के माध्यम से भारतीय समुदाय को हर संभव सहायता और सही जानकारी प्रदान की जा रही है।



