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छत्तीसगढ़ और झारखंड में आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव वाले रहने वाले हैं। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जारी किया है कि 9 अप्रैल तक दोनों राज्यों के आसमान में बादलों का डेरा रहेगा। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कई जिलों में तेज आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि होने की संभावना है जिससे झुलसाने वाली गर्मी से राहत मिलेगी और तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।
छत्तीसगढ़ के उत्तरी और मध्य इलाकों में मौसम का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। सरगुजा, जशपुर, कोरिया और सूरजपुर जैसे जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं राजधानी रायपुर सहित दुर्ग, बेमेतरा और कवर्धा में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है। कुछ इलाकों में ओले गिरने से फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है। बिलासपुर और मुंगेली के क्षेत्रों में भी बादल छाए रहने से दिन के तापमान में 3 से 5 डिग्री तक की कमी आने की उम्मीद है।
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झारखंड की बात करें तो यहाँ भी मौसम विभाग ने गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की चेतावनी दी है। रांची, बोकारो, हजारीबाग और रामगढ़ के मध्य हिस्सों में बारिश की प्रबल संभावना बनी हुई है। पलामू और गढ़वा जैसे जिलों में धूल भरी आंधी चलने के बाद मौसम ठंडा होने के आसार हैं। जमशेदपुर और कोल्हान प्रमंडल के अन्य हिस्सों में भी 8 और 9 अप्रैल को तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है जिससे रात के समय ठंडक महसूस होगी।
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इस बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है क्योंकि बारिश और ओलावृष्टि से खुले में रखे अनाज को नुकसान हो सकता है। आम लोगों को भी बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों और ऊंचे खंभों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। 9 अप्रैल के बाद धीरे-धीरे आसमान साफ होने लगेगा और 10 अप्रैल से सूरज की तपिश फिर से बढ़ने की संभावना है।
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देशभर के मौसम की बात करें तो उत्तर से दक्षिण तक वायुमंडल में हो रहे बदलावों का असर साफ दिखाई दे रहा है। उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में ताजा पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से बर्फबारी और बारिश का दौर जारी है, जिसका सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ रहा है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में धूल भरी तेज हवाओं के साथ छिटपुट बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है, जिससे चिलचिलाती धूप से कुछ समय के लिए राहत मिली है। वहीं दूसरी ओर, दक्षिण भारत के राज्यों जैसे केरल और कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियों के कारण मध्यम वर्षा हो रही है, जबकि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भारी नमी के चलते गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। मध्य भारत के राज्यों में भी बादलों की आवाजाही ने लू के प्रकोप को फिलहाल थाम कर रखा है, जिससे देश के अधिकांश हिस्सों में अप्रैल की शुरुआती गर्मी का असर उम्मीद से कम नजर आ रहा है।
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मध्य प्रदेश और ओडिशा में भी मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है, जहाँ अगले कुछ दिनों तक प्री-मानसून गतिविधियों के चलते राहत की उम्मीद है। मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों जैसे जबलपुर, छिंदवाड़ा, मंडला और बालाघाट जिलों में बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है, जिससे पारे में गिरावट आएगी। वहीं ओडिशा की स्थिति देखें तो यहाँ तटीय और आंतरिक क्षेत्रों में ‘कालबैसाखी’ (Thunderstorm) का असर दिखने लगा है। मयूरभंज, क्योंझर और बालासोर जैसे जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और बिजली कड़कने के साथ भारी बौछारें पड़ने का अनुमान है। इन दोनों राज्यों के कई हिस्सों में बादल छाए रहने से दिन के तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की कमी देखी जा सकती है, जिससे लू का प्रभाव कम होगा।
बेमौसम हुई इस बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि यह समय रबी फसलों की कटाई और फलों के पकने का होता है। खेतों में खड़ी गेहूं की तैयार फसल के भीगने से दानों की चमक फीकी पड़ने और फसल के जमीन पर बिछ जाने का खतरा बढ़ गया है, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा। बागवानी की बात करें तो आम और लीची के पेड़ों पर आए बौर (मंजर) और छोटे फल तेज आंधी व ओलों के कारण टूटकर गिर रहे हैं, जिससे फलों के राजा कहे जाने वाले आम की फसल को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही, ओलावृष्टि ने टमाटर, मिर्च, गोभी और लौकी जैसी सब्जियों की कोमल लताओं और पत्तों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिससे न केवल गुणवत्ता खराब होगी बल्कि बाजार में आने वाली सब्जियों की आवक कम होने से आने वाले दिनों में इनकी कीमतों में भी उछाल देखने को मिल सकता है।
अप्रैल के महीने में मौसम का यह मिजाज प्रकृति के दोहरे चेहरे को दर्शाता है, जहाँ एक ओर तपती धूप और बढ़ते पारे से आम जनमानस को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर अन्नदाता के लिए यह आफत बनकर आई है। बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों और बागवानी को जो नुकसान पहुँचाया है, उसकी भरपाई करना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। हालांकि 9 अप्रैल के बाद मौसम के धीरे-धीरे साफ होने और तापमान में पुनः बढ़ोतरी की संभावना है, लेकिन इस अल्पकालिक बदलाव ने कृषि क्षेत्र और स्थानीय बाजार की कीमतों पर गहरा प्रभाव डाल दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन और कृषि विभाग की सतर्कता ही प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव का सही मार्ग प्रशस्त करेगी।


