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कोडीन कफ सिरप कांड सामने आने के बाद प्रदेश में थोक दवा लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सख्त कर दिया गया है। अब दवा लाइसेंस लेने के लिए संबंधित दुकान और गोदाम की जियो-टैगिंग अनिवार्य होगी। आवेदक को अपनी मौजूदगी में प्रस्तावित परिसर का जीपीएस विवरण देना होगा। साथ ही औषधि निरीक्षकों द्वारा जारी किए गए लाइसेंसों में हर माह 10 प्रतिशत मामलों का रैंडम सत्यापन सहायक आयुक्त द्वारा किया जाएगा।

औषधि आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लाइसेंस जारी करने में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कफ सिरप प्रकरण के बाद नियमों की अनदेखी की शिकायतें मिली थीं, जिनकी जांच चल रही है। इस जांच की जद में कई औषधि निरीक्षक और सहायक आयुक्त भी आ सकते हैं।

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नए नियमों के तहत अब आवेदक को अनुभव प्रमाणपत्र के साथ उस अवधि में मिले वेतन का प्रमाण भी देना होगा। इसके लिए पे-स्लिप अनिवार्य कर दी गई है। आवेदन पत्र में नाम, पता, मोबाइल नंबर, पैन, आवासीय विवरण के साथ पिछले तीन वर्षों में किए गए व्यवसाय या पेशे से संबंधित शपथ पत्र भी देना होगा।

फार्मासिस्ट का पूरा विवरण, अनुभव प्रमाणपत्र और उससे जुड़ी फर्म की वैधता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिन फर्मों का लाइसेंस निरस्त हो चुका है या जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है, उनके द्वारा जारी अनुभव प्रमाणपत्र मान्य नहीं होंगे। अनुभव प्रमाणपत्र देने वाली फर्म को वेतन भुगतान का प्रमाण, उपस्थिति या वेतन पंजिका, वैध लाइसेंस और शपथ पत्र भी देना होगा।

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प्राइवेट लिमिटेड या लिमिटेड कंपनियों के मामले में प्रबंधकों की सूची और दैनिक व्यवसाय के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का शपथ पत्र अनिवार्य होगा। यदि दुकान या गोदाम आवेदक के स्वामित्व में नहीं है तो सामान्य किरायानामे की जगह रजिस्टर्ड किरायानामा देना होगा। परिसर की जियो-टैगिंग के साथ दवाओं की उपलब्धता, रेफ्रिजरेटर, कोल्ड रूम और बिजली की व्यवस्था का भी भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसके अलावा आसपास की दुकानों और प्रतिष्ठानों का पूरा विवरण भी देना होगा।

औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों की जांच के दौरान सभी कमियां एक ही बार में बताई जाएं। फर्म में शामिल सभी व्यक्तियों का विवरण जांचा जाएगा और यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि उनमें कोई ऐसा व्यक्ति शामिल न हो, जिसका पहले नारकोटिक्स एक्ट के तहत लाइसेंस निरस्त हुआ हो। यह भी देखा जाएगा कि प्रस्तावित प्रतिष्ठान पूरी तरह आवासीय क्षेत्र में स्थित न हो।

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स्वीकृत आवेदनों में सहायक आयुक्त द्वारा हर माह 10 प्रतिशत मामलों का रैंडम भौतिक सत्यापन किया जाएगा। जांच में गंभीर कमियां पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त किया जाएगा, जबकि मामूली कमियों के मामले में उन्हें दूर कराने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य साफ है—दवा कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाना और अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना।
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