न्यू यॉर्क/नई दिल्ली:
फीफा विश्व कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। 48 टीमों के साथ शुरू हुए इस महाकुंभ में अब सिर्फ आठ दिग्गज टीमें बची हैं, जिनके बीच विश्व चैंपियन बनने की असली जंग होगी। 19 जुलाई को न्यू यॉर्क/न्यू जर्सी स्टेडियम में होने वाले ग्रैंड फिनाले (Grand Finale) तक पहुंचने के लिए अब हर एक मुकाबला पूरी तरह ‘करो या मरो’ का होने वाला है। इस बार का विश्व कप कई मायनों में ऐतिहासिक रहा है, जहां कुछ बड़ी और फेवरेट टीमों का सफर उम्मीद से बहुत पहले खत्म हो गया, वहीं कई अंडरडॉग टीमों ने इतिहास रचते हुए पहली बार क्वार्टर फाइनल का टिकट कटाया है। इस बार अंतिम-8 में अर्जेंटीना, फ्रांस, इंग्लैंड, स्पेन, बेल्जियम, मोरक्को, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे ने अपनी जगह पक्की की है।
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अमेरिका के समयानुसार 9 जुलाई से इन नॉकआउट मैचों की शुरुआत हो रही है, लेकिन भारत में फुटबॉल फैंस इन रोमांचक मुकाबलों का लाइव मजा 10 जुलाई की रात डेढ़ बजे (1:30 AM) से उठा सकेंगे। भारतीय समय के मुताबिक पहला क्वार्टर फाइनल मुकाबला 10 जुलाई को फ्रांस और मोरक्को के बीच रात 1:30 बजे खेला जाएगा। इसके बाद 11 जुलाई को रात 12:30 बजे स्पेन का सामना बेल्जियम से होगा। 12 जुलाई को दो बड़े मैच होंगे, जिसमें रात 2:30 बजे नॉर्वे की भिड़ंत इंग्लैंड से और सुबह 6:30 बजे डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना का मुकाबला स्विट्जरलैंड से होगा।
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इस विश्व कप का सबसे बड़ा उलटफेर यह रहा कि फुटबॉल इतिहास के दो सबसे बड़े सूरमा ब्राजील और जर्मनी क्वार्टर फाइनल की दहलीज भी पार नहीं कर सके। वर्ल्ड कप के इतिहास में यह बिल्कुल पहली बार हुआ है जब ये दोनों दिग्गज टीमें एक साथ अंतिम-8 की रेस से इतनी जल्दी बाहर हो गई हैं। दूसरी ओर, कतर विश्व कप 2022 की चार सेमीफाइनलिस्ट टीमों अर्जेंटीना, फ्रांस, इंग्लैंड और मोरक्को ने लगातार दूसरी बार अंतिम-8 में जगह बनाकर अपना दबदबा साबित किया है। चूंकि अर्जेंटीना और फ्रांस ड्रॉ के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं, इसलिए फुटबॉल फैंस को लगातार दूसरी बार इन दोनों के बीच 2022 जैसा ही ब्लॉकबस्टर फाइनल देखने की उम्मीद जगी हुई है।
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इस बार के क्वार्टर फाइनल में पहुंची टीमों में से अर्जेंटीना (3 खिताब), फ्रांस (2 खिताब), इंग्लैंड (1 खिताब) और स्पेन (1 खिताब) पहले भी चैंपियन बन चुके हैं, जबकि बेल्जियम, मोरक्को, स्विट्जरलैंड और एर्लिंग हालंद की कप्तानी वाली नॉर्वे की टीम अपने पहले विश्व कप खिताब की तलाश में जी-जान लगा देगी। अगर इनमें से कोई नई टीम बाजी मारती है, तो साल 2010 में स्पेन के बाद दुनिया को कोई नया फुटबॉल चैंपियन मिलेगा।
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रिकॉर्ड्स की बात करें तो एर्लिंग हालंद की अगुवाई में नॉर्वे ने प्री-क्वार्टर फाइनल में पांच बार की चैंपियन ब्राजील को बाहर का रास्ता दिखाकर पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है। अब नॉर्वे का सामना इंग्लैंड से होगा, जो विश्व कप के इतिहास में सबसे ज्यादा 10 बार क्वार्टर फाइनल खेलने वाली सबसे अनुभवी टीम है। वहीं मोरक्को की टीम लगातार दो विश्व कप में क्वार्टर फाइनल खेलने वाली पहली अफ्रीकी टीम बन गई है, जिसने अफ्रीकी फुटबॉल के लिए एक नया अध्याय लिख दिया है। इस बार भी टूर्नामेंट में 6 टीमों के साथ यूरोप का दबदबा बरकरार है, जबकि दक्षिण अमेरिका से सिर्फ अर्जेंटीना और अफ्रीका से केवल मोरक्को ही मैदान में बचे हैं। पूरे टूर्नामेंट में फ्रांस एकमात्र ऐसी टीम है जिसने अपने सभी 5 मैच निर्धारित 90 मिनट के भीतर जीते हैं, जबकि अर्जेंटीना ने भी अपने 5 मैच जीते हैं लेकिन उसे केप वर्डे के खिलाफ एक्स्ट्रा टाइम खेलना पड़ा था।
रणनीति और खेल के लिहाज से देखें तो स्पेन की दीवार इस बार सबसे मजबूत साबित हुई है; स्पेनिश टीम ने 5 मैचों में अब तक एक भी गोल नहीं खाया है, जो राउंड ऑफ-32 के नियम के बाद विश्व कप के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है। वहीं, अटैक (आक्रमण) के मामले में लियोनल मेसी की अर्जेंटीना और फ्रांस सबसे खतरनाक हैं, जिन्होंने अब तक टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 14-14 गोल दागे हैं। टूर्नामेंट में व्यक्तिगत स्तर पर ‘गोल्डन बूट’ (Golden Boot) की जंग भी बेहद कांटे की हो चुकी है, जिसमें महान फुटबॉलर लियोनल मेसी 8 गोल के साथ सबसे आगे चल रहे हैं, लेकिन उनके ठीक पीछे किलियन एमबाप्पे और एर्लिंग हालंद 7-7 गोल के साथ उनके पीछे हाथ धोकर पड़े हैं। इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन भी 6 गोल के साथ इस रेस में मजबूती से बने हुए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या मेसी और एमबाप्पे जैसे दिग्गज अपनी पुरानी बादशाहत कायम रखते हैं या फिर हालंद की नॉर्वे और मोरक्को जैसी टीमें कोई नया करिश्मा करके पूरी दुनिया को चौंका देती हैं।


