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नई दिल्ली | 29 मार्च 2026
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारतीय शारीरिक संरचना और स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि पूरे शरीर के मोटापे की तुलना में ‘पेट या शरीर के मध्य भाग का मोटापा’ (Abdominal Obesity) भारतीयों के लिए कहीं अधिक बड़ा जोखिम है। विशेष रूप से भारतीय संदर्भ में, अक्सर जो लोग बाहर से दुबले-पतले नजर आते हैं, उनके अंगों के आसपास काफी मात्रा में ‘आंतरिक वसा’ (Visceral Fat) जमा होती है, जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों का मुख्य कारण बन रही है।डॉ. जितेंद्र सिंह आज दिल्ली में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एच.के. चोपड़ा द्वारा संपादित पाठ्यपुस्तक “एडवांसेज इन ओबेसिटी एंड लिपिड प्रबंधन इन सीवीडी” के विमोचन अवसर पर बोल रहे थे।
पेट का मोटापा: बीमारियों का घर
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि शरीर के मध्य भाग में जमा चर्बी अपने आप में एक स्वतंत्र जोखिम है। भले ही कोई व्यक्ति देखने में सामान्य लगे, लेकिन यदि उसके पेट के आसपास वसा अधिक है, तो उसे फैटी लिवर, डिस्लिपिडेमिया और चयापचय संबंधी विकार होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में पेट के मोटापे की व्यापकता बढ़ रही है, जिसके लिए शीघ्र पहचान और लक्षित उपचार की तत्काल आवश्यकता है।
युवाओं में बढ़ते खतरे और प्रधानमंत्री का आह्वान
डॉ. सिंह ने इस पुस्तक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत और मोटापा मुक्त भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप बताया। उन्होंने युवाओं में बढ़ते टाइप-2 मधुमेह और हृदय संबंधी जटिलताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे बदलती जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों का परिणाम बताया। उन्होंने फिटनेस के प्रति ‘अवैज्ञानिक दृष्टिकोण’ (जैसे बिना आराम के अत्यधिक व्यायाम) से बचने की सलाह दी और निरंतर अनुशासन, पर्याप्त नींद व वैज्ञानिक रूप से निर्देशित देखभाल पर जोर दिया।
सटीक रोकथाम और आधुनिक तकनीक
300 से अधिक वैश्विक विशेषज्ञों के योगदान से तैयार यह पाठ्यपुस्तक पारंपरिक इलाज से हटकर ‘सटीक रोकथाम’ (Precision Prevention) पर केंद्रित है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सक्षम नैदानिक प्रणालियों और सेमाग्लूटाइड जैसी उभरती हुई नई चिकित्सा पद्धतियों का व्यापक वर्णन किया गया है। डॉ. सिंह ने चेतावनी दी कि 2050 तक भारत में मोटापे के प्रसार में तीव्र वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे निपटने के लिए अभी से जन जागरूकता और साक्ष्य-आधारित नैदानिक प्रथाओं को अपनाना होगा।
23 खंडों और 172 अध्यायों वाली यह पुस्तक शोध और रोगी देखभाल के बीच की खाई को पाटने का काम करेगी। कार्यक्रम में डॉ. विवेका कुमार, डॉ. प्रवीण चंद्र और डॉ. जेपीएस साहनी सहित देश के कई दिग्गज हृदय रोग विशेषज्ञ उपस्थित थे।

