अब सभी सरकारी काम होंगे ऑनलाइन, ई-ऑफिस लागू करने विभागों को निर्देश जारी
दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की पहली डिजिटल जनगणना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 2027 की जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति मिली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस जनगणना में लगभग 30 लाख कर्मचारी जुटाए जाएंगे, जो इसे अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय प्रक्रिया बनाएगा।
मंत्री ने बताया कि जनगणना 2027 को दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मकान सूचीकरण और आवास जनगणना होगी। इसके बाद फरवरी 2027 से जनसंख्या की गिनती शुरू होगी। बर्फ से ढके क्षेत्रों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 से ही शुरू हो जाएगी। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 रात 12 बजे तय की गई है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 होगी।
अब सभी सरकारी काम होंगे ऑनलाइन, ई-ऑफिस लागू करने विभागों को निर्देश जारी
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह भारत की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 की जनगणना कोविड महामारी के कारण स्थगित करनी पड़ी। इस बार जनगणना को पूरी तरह डिजिटल डिजाइन के साथ तैयार किया गया है, जिसमें डेटा सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। लोगों को स्व-गणना का विकल्प भी दिया जाएगा और जाति गणना को भी शामिल किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि जनगणना-एक-सेवा (CaaS) के जरिए राज्यों, मंत्रालयों और अन्य संस्थानों को उपयोगी और मशीन-पठनीय डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। जनगणना कार्य को सफल बनाने के लिए देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा।
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कैबिनेट बैठक में कोयला क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा सुधार भी किया गया। Coal Setu के माध्यम से कोयला सेक्टर में नई सुविधाएँ लागू की जाएँगी। भारत ने 2024-25 में एक अरब टन से अधिक कोयला उत्पादन कर आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम उठाया है। कोयले के आयात में कमी से देश को 60 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है।


