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नई दिल्ली | 25 फरवरी, 2026 भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश में महिलाओं के बीच दूसरे सबसे आम और घातक ‘सर्वाइकल कैंसर’ को जड़ से मिटाने के लिए सरकार ने देशभर में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। यह विशेष राष्ट्रीय अभियान मुख्य रूप से 14 साल की किशोरियों पर केंद्रित होगा, जिन्हें घातक वायरस से बचाने के लिए टीके की खुराक दी जाएगी।
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महंगा टीका अब बिल्कुल मुफ्त और स्वैच्छिक
बाजार में जिस ‘गार्डासिल-4’ वैक्सीन की एक डोज की कीमत लगभग 3,927 रुपये है, वह अब सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक होगा, जिसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग की किशोरियों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी टीकाकरण केंद्रों को 24 घंटे चलने वाली सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा गया है।
एक डोज, उम्रभर की सुरक्षा
विशेषज्ञों के अनुसार, 14 साल की उम्र में वैक्सीन की एक डोज ही शरीर में मजबूत और लंबे समय तक सुरक्षा चक्र तैयार करने के लिए पर्याप्त है। इस अभियान में गार्डासिल नाम के क्वाड्रिवैलेंट एचपीवी टीके का उपयोग किया जाएगा। यह टीका विशेष रूप से एचपीवी टाइप 16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करता है, जो सर्वाइकल कैंसर के 70% से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। साथ ही, यह टाइप 6 और 11 से होने वाले अन्य संक्रमणों से भी बचाव करता है।
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भारत में डराने वाले हैं आंकड़े
भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति बेहद गंभीर है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर साल लगभग 80 हजार नए मामले सामने आते हैं और करीब 42 हजार से अधिक महिलाओं की इस बीमारी से मौत हो जाती है। इस टीके के आने से इन मौतों के आंकड़ों में भारी कमी आने की उम्मीद है। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह वैक्सीन 93 से 100 प्रतिशत तक प्रभावी पाई गई है।
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वैश्विक स्तर पर प्रमाणित है सुरक्षा
2006 से अब तक दुनिया भर में इस वैक्सीन की 50 करोड़ से अधिक डोज दी जा चुकी हैं, जिसका सुरक्षा रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। इस अभियान के साथ ही भारत दुनिया के उन 160 देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जिन्होंने अपने स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एचपीवी वैक्सीन को जगह दी है। 90 से अधिक विकसित देश पहले ही इसके माध्यम से अपने यहाँ कैंसर के मामलों में बड़ी गिरावट दर्ज कर चुके हैं।


