सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) में राशन कार्डों की हेराफेरी, फर्जीवाड़े और सब्सिडी लीकेज को पूरी तरह खत्म करने के लिए केंद्र सरकार बड़ा डिजिटल सुधार करने जा रही है। इसके तहत खाद्य सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजने के बजाय ‘केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा’ (CBDC / डिजिटल रुपया) वॉलेट में ट्रांसफर की जाएगी। चार केंद्र शासित प्रदेशों व राज्यों में सफल परीक्षण के बाद अब इसे देश के 7 बड़े राज्यों में लागू किया जा रहा है।
इन 7 राज्यों में लागू होगी नई व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इस डिजिटल व्यवस्था को अब उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश राज्यों में विस्तारित किया जा रहा है:(उल्लेखनीय है कि देश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत प्रतिमाह करीब 78.85 करोड़ लाभार्थियों को 19,000 करोड़ रुपये का खाद्यान्न वितरित किया जाता है।)
कैसे काम करेगी डिजिटल रुपये की व्यवस्था?
लाभार्थी राशन दुकान पर जाकर निर्धारित क्यूआर (QR) कोड स्कैन करेंगे। स्कैन होते ही दुकानदार का मार्जिन और सरकार का हिस्सा स्वतः तय खातों में ट्रांसफर हो जाएगा। बिना इंटरनेट या साधारण मोबाइल वाले लाभार्थियों को एसएमएस (SMS) के जरिए ओटीपी-आधारित डिजिटल वाउचर मिलेगा। दुकानदार द्वारा सिस्टम में ओटीपी दर्ज करते ही ट्रांजैक्शन पूरा हो जाएगा। यदि कोई लाभार्थी निश्चित अवधि में अपना कूपन भुना नहीं पाता, तो राशि स्वतः सरकारी खाते में वापस लौट जाएगी। इससे राशन डीलरों द्वारा पिछली तारीखों में फर्जी एंट्री बनाना पूरी तरह असंभव हो जाएगा।
सरकारी बैंक खातों के संचालन पर सख्त पाबंदियां: छत्तीसगढ़ सरकार ने जारी किए नए निर्देश
क्या है सीबीडीसी (CBDC) और यह यूपीआई से कैसे अलग है?
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आधिकारिक डिजिटल करेंसी है, जो कागजी नोटों का ही डिजिटल रूप है। यह बैंक खाते में जमा पैसे को एक जगह से दूसरी जगह भेजने का केवल एक ‘माध्यम’ (रेलवे ट्रैक) है। यह अपने आप में कानूनी मुद्रा (पैसा) है। इस डिजिटल टोकन में कोडिंग के जरिए यह तय किया जाता है कि वह पैसा केवल अधिकृत राशन दुकान पर सिर्फ अनाज खरीदने के लिए ही खर्च हो सकेगा। इसे न तो कैश के रूप में निकाला जा सकता है और न ही शराब, मोबाइल रिचार्ज या किसी अन्य गैर-खाद्य कार्य में इस्तेमाल किया जा सकता है।
पायलट प्रोजेक्ट का सफर
इस योजना का पहला सफल परीक्षण 15 फरवरी 2026 को गुजरात और 26 फरवरी 2026 को पुडुचेरी में किया गया था। वहां मिले सकारात्मक परिणामों के बाद 14 अगस्त को इसे चंडीगढ़ तथा दादरा एवं नगर हवेली में लागू किया गया, जिसके बाद अब इसे 7 प्रमुख राज्यों में बड़े पैमाने पर शुरू किया जा रहा है।

