नई दिल्ली: देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में एक बड़े डिजिटल युग की शुरुआत होने जा रही है। 1 जनवरी 2027 से देश भर में एफआईआर (FIR) दर्ज होने से लेकर जांच, साक्ष्य जुटाने और अदालत में चार्जशीट दाखिल करने तक की पूरी प्रक्रिया को 100 फीसदी डिजिटल करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस महात्वाकांक्षी योजना के लिए इसी साल 31 दिसंबर तक सभी राज्यों में जरूरी तकनीकी ढांचा तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद जांच अधिकारियों की केस डायरी भी पूरी तरह डिजिटल होगी, जिससे पेपरलेस जांच प्रणाली जमीन पर दिखाई देगी।

नए कानूनों के दो साल पूरे: हरियाणा बना देश का चैंपियन

देश में 1 जुलाई 2024 से लागू हुए तीनों नए कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—के दो साल पूरे हो गए हैं। इन 730 दिनों के भीतर इन कानूनों को धरातल पर उतारने और सभी पैमानों पर खरा उतरने में हरियाणा ने पूरे देश में बाजी मारी है। गृह मंत्रालय की टॉप-5 राज्यों की सूची में हरियाणा पहले पायदान पर है, जबकि इसके बाद क्रमशः गोवा, असम, चंडीगढ़ और पंजाब का नंबर आता है। चौंकाने वाली बात यह है कि देश की राजधानी दिल्ली इस शीर्ष सूची में जगह नहीं बना पाई है। आंकड़ों के अनुसार, इन नए कानूनों के तहत डिजिटल प्रक्रिया अपनाने से पुलिस और अदालतों के समय में करीब 25 प्रतिशत की बड़ी बचत दर्ज की गई है।

दो वर्षों में 63 हजार से ज्यादा ‘जीरो FIR’

नए कानूनों के तहत शुरू की गई ‘जीरो FIR’ व्यवस्था का देश भर में व्यापक असर देखने को मिला है। पिछले दो सालों में पूरे देश में कुल 63,572 जीरो एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें से करीब 13 हजार मामले ऐसे थे, जो एक राज्य से दूसरे राज्य से संबंधित थे। इस ऐतिहासिक व्यवस्था के तहत अब कोई भी पीड़ित देश के किसी भी राज्य के किसी भी थाने में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, जिसे बाद में संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने को कानूनी कार्रवाई के लिए ट्रांसफर कर दिया जाता है।

चार्जशीट दाखिल करने की रफ्तार में भारी उछाल

डिजिटलाइजेशन और नए कानूनों की सख्ती के कारण मामलों की जांच और चार्जशीट दाखिल करने की गति में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। साल 2024 तक जहां निर्धारित 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की दर महज 40% के आसपास थी, वह अब बढ़कर 61% तक पहुंच गई है। वहीं, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के मामलों में दो महीने के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की दर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। यह दर साल 2018 के 44% के मुकाबले साल 2025 में बढ़कर 75% तक पहुंच गई है।

गृह मंत्रालय का मानना है कि पूरी तरह डिजिटल जांच व्यवस्था लागू होने से पुलिस की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी। इसके साथ ही कानूनी दस्तावेजों की निगरानी आसान होगी, कागजी लेती-देती में होने वाली देरी खत्म होगी और अंततः पीड़ितों को समय पर न्याय सुनिश्चित कराया जा सकेगा।

 

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