देश में बिछा जल परीक्षण प्रयोगशालाओं का जाल, अब आपके नल के पानी पर होगी पैनी नजर

रायपुर: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में अब ‘नल से जल’ सिर्फ एक सुविधा भर नहीं रह गया है, बल्कि उस पानी की शुद्धता को लेकर भी जवाबदेही तय कर दी गई है। राज्य के सुदूर वनांचलों से लेकर मैदानी गांवों तक पहुंचने वाले पानी पर पैनी नजर रखने के लिए प्रदेश में 78 जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं का एक मजबूत तंत्र सक्रिय हो गया है।

जमीनी स्तर पर लैब का नेटवर्क राज्यसभा में पेश ताजा आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ ने जल परीक्षण के मामले में त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र तैयार किया है। रायपुर स्थित एक मुख्य राज्य स्तरीय प्रयोगशाला के मार्गदर्शन में 29 जिला और क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं। इतना ही नहीं, जांच की पहुंच को ब्लॉक स्तर तक ले जाते हुए 47 उप-मंडल और मोबाइल प्रयोगशालाएं तैनात की गई हैं। यह सुनिश्चित करता है कि पानी की जांच के लिए किसी ग्रामीण को लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

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महज लैब खोलना ही काफी नहीं है, उनकी रिपोर्ट का विश्वसनीय होना भी जरूरी है। छत्तीसगढ़ इस मोर्चे पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य की कुल प्रयोगशालाओं में से 47 को आधिकारिक मान्यता (Accreditation) मिल चुकी है। इसमें जिला स्तर की 28 और ब्लॉक स्तर की 18 लैब शामिल हैं। इसका सीधा मतलब है कि इन लैब से निकली टेस्ट रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता।

अब आम जनता की लैब तक पहुंच सरकार की नई नीति के तहत अब ये लैब केवल विभाग तक सीमित नहीं हैं। छत्तीसगढ़ का कोई भी नागरिक अपने घर या कुएं के पानी की जांच नाममात्र शुल्क देकर करा सकता है। विशेष रूप से राज्य के उन हिस्सों में जहां फ्लोराइड या आयरन की समस्या अधिक है, वहां के ग्रामीणों के लिए यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं है। अब लोग स्वयं जागरूक होकर अपने पीने के पानी की गुणवत्ता जान सकेंगे।

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डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता जल जीवन मिशन के WQMIS पोर्टल के जरिए अब छत्तीसगढ़ के हर गांव की पानी की रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध है। ‘सिटीजन कॉर्नर’ के माध्यम से लोग देख सकते हैं कि उनके गांव के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और नलों में आने वाला पानी मानकों पर खरा उतर रहा है या नहीं। दिसंबर 2024 में जारी नई गाइडलाइन्स के बाद अब स्रोत से लेकर घर की टोटी तक, हर स्तर पर सैंपलिंग की जा रही है।

एक उज्जवल भविष्य की ओर पीपीपी (PPP) मॉडल और अतिरिक्त लैब की स्थापना के साथ छत्तीसगढ़ सरकार इस नेटवर्क को और विस्तार देने की तैयारी में है। साफ़ पानी की यह मुहिम न केवल बीमारियों को कम करेगी, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण स्वास्थ्य की नींव को भी मजबूत करेगी।

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