मजदूरों को भुगतान की गारंटी: ‘काम के 15 दिन के भीतर मिलेगा पैसा, देरी हुई तो देना होगा मुआवजा; नई रोजगार योजना पर सरकार सख्त
नई दिल्ली | 06 फरवरी 2026 देश की न्याय प्रणाली को मजबूत करने वाले युवा कंधों को अब आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा। केंद्र सरकार और भारतीय बार काउंसिल (BCI) ने जूनियर वकीलों के शुरुआती करियर की चुनौतियों को समझते हुए उनके लिए मासिक स्टाइपेंड की सिफारिश की है। लोकसभा में केंद्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने जानकारी दी कि सरकार कानून के क्षेत्र में आने वाली नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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सम्मानजनक मानदेय की सिफारिश
भारतीय बार काउंसिल ने सभी राज्य बार काउंसिलों और लॉ फर्मों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके तहत जूनियर अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम 20,000 रुपये प्रति माह , ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम 15,000 रुपये प्रति माहतय किया गया है:
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रिपोर्ट के अनुसार, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों ने पहले ही अपने स्तर पर जूनियर वकीलों के लिए वित्तीय सहायता योजनाएं शुरू कर दी हैं। वहीं, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में एक व्यवस्थित ढांचे और बजटीय सहायता के माध्यम से इस योजना को लागू करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।
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सरकार का मानना है कि यदि युवा वकीलों को शुरुआत में आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, तो वे अधिक समर्पण के साथ न्याय प्रणाली का हिस्सा बन सकेंगे। यह कदम न केवल वकीलों के कल्याण के लिए है, बल्कि इससे आम जनता को मिलने वाली कानूनी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
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“जहाँ एक ओर सरकार BNS और POCSO के जरिए समाज को सुरक्षित बना रही है और दिव्यांगजनों तक न्याय पहुँचा रही है, वहीं दूसरी ओर न्याय के इन रक्षकों (युवा वकीलों) को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 20,000 रुपये तक के स्टाइपेंड की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। यह ‘सबका साथ, सबका विकास’ के साथ-साथ ‘सबका न्याय’ की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
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