रायपुर: छत्तीसगढ़ ने 1 नवंबर 2000 को अपनी स्थापना के बाद से शासन और प्रशासन के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक लंबी दूरी तय की है। राजस्व विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में राज्य के प्रशासनिक ढांचे को न केवल दोगुना किया गया है, बल्कि इसे तकनीक के साथ जोड़कर आम जनता के लिए बेहद आसान बना दिया गया है।
जिले और संभाग: प्रशासनिक पहुंच में ऐतिहासिक वृद्धि
राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में केवल 16 जिले थे, जो अब बढ़कर 33 हो गए हैं। जिलों की इस संख्या में हुई 100% से अधिक की बढ़ोतरी यह सुनिश्चित करती है कि कलेक्टर और जिला प्रशासन की पहुंच सुदूर वनांचल के ग्रामीणों तक सीधे हो सके। इसी तरह, प्रशासनिक तालमेल और बेहतर निगरानी के लिए संभागों की संख्या को भी 3 से बढ़ाकर 5 किया गया है।
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राजस्व सुधार: तहसील और अनुविभागों का जाल
आम नागरिकों को अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए अब शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। आंकड़ों के अनुसार:
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अनुविभाग: राज्य में अनुविभागों की संख्या 58 से बढ़कर 117 हो गई है।
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तहसील: साल 2000 में जहाँ केवल 96 तहसीलें थीं, वहां अब 251 तहसीलों के माध्यम से जनता को सेवाएँ मिल रही हैं।
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पटवारी हल्का: जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं को सुलझाने के लिए पटवारी हल्कों की संख्या 3,070 से बढ़ाकर 5,828 कर दी गई है।
डिजिटल छत्तीसगढ़: 20 हजार से अधिक गांव हुए ऑनलाइन
इस विकास यात्रा का सबसे प्रभावशाली हिस्सा ‘भू-अभिलेख कंप्यूटरीकरण’ है। राज्य गठन के समय शून्य से शुरू हुआ यह सफर आज 20,281 गांवों तक पहुँच चुका है। अब किसान अपने घर बैठे ही जमीन के नक्शे और खसरा-खतौनी की नकल प्राप्त कर सकते हैं, जिससे राजस्व कार्यों में पारदर्शिता आई है और भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है।
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एक नजर में बदलाव की तस्वीर
| विवरण | वर्ष 2000 | वर्ष 2025 |
| कुल जिले | 16 | 33 |
| कुल तहसीलें | 96 | 251 |
| पटवारी हल्का | 3,070 | 5,828 |
| डिजिटल गांव | 0 | 20,281 |
छत्तीसगढ़ के इन 25 सालों ने यह साबित किया है कि छोटा प्रशासन और बड़ी पहुंच ही विकास का असली मंत्र है। राजस्व मंडल के ये आंकड़े प्रदेश के हर नागरिक के जीवन को सुगम बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
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