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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा और इसी के साथ वे देश की पहली ऐसी वित्त मंत्री बन जाएंगी, जिन्होंने लगातार नौ बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाया है। इस बार के बजट से विकास की रफ्तार बनाए रखने, राजकोषीय अनुशासन कायम रखने और विनिर्माण व रोजगार को बढ़ावा देने वाले बड़े कदमों की उम्मीद की जा रही है।

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आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब आम बजट रविवार को पेश किया जाएगा। यह बजट ऐसे समय आ रहा है जब वैश्विक आर्थिक माहौल अनिश्चित बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ, वैश्विक व्यापारिक तनाव, घरेलू मांग में सुस्ती और जीएसटी दरों में कटौती से सरकारी राजस्व पर दबाव जैसी चुनौतियां सरकार के सामने हैं। इन परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था को गति देना वित्त मंत्री के लिए बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।

सरकार पर घरेलू खपत बढ़ाने, रोजगार सृजन तेज करने और पूंजीगत निवेश में इजाफा करने का दबाव है। हालांकि आयकर और जीएसटी में राहत, बुनियादी ढांचे पर बढ़ता खर्च और रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती जैसे कदमों से अब तक अर्थव्यवस्था को सहारा मिला है। फिर भी इन सबके बीच विकास की रफ्तार बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में संभावित उछाल को देखते हुए सरकार सीमित समय का लाभ उठाकर पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में बदलाव कर सकती है। साथ ही घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नियमों को सरल बनाने और संरचनात्मक सुधारों पर जोर दिया जा सकता है।

रोजगार और विनिर्माण क्षेत्र इस बजट के प्रमुख केंद्र में रहेंगे। कौशल विकास, अपरेंटिसशिप कार्यक्रमों और उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाली योजनाओं की घोषणा संभव है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को राहत देने के लिए अतिरिक्त आवंटन, सस्ती ऋण सुविधा और गारंटी सहायता जैसी घोषणाएं की जा सकती हैं। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं में भी सुधार कर निर्यात और रोजगार को बढ़ावा देने की तैयारी है।

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हरित ऊर्जा क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े निवेश को बढ़ावा दिया जा सकता है। स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों के घरेलू उत्पादन पर भी विशेष ध्यान रहेगा।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह बजट अहम माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम जैसे चुनावी राज्यों के लिए विशेष योजनाओं और कल्याणकारी घोषणाओं की संभावना जताई जा रही है। सरकार को कल्याणकारी खर्च और राजकोषीय संतुलन के बीच सावधानीपूर्वक तालमेल बैठाना होगा।

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पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सड़कों, रेलवे, रक्षा, शहरी अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स पर पूंजीगत व्यय बढ़ने की उम्मीद है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पूंजीगत निवेश में वृद्धि से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए आयकर में मामूली कटौती संभव है, जिससे खपत बढ़ सके।

कुल मिलाकर, यह बजट आर्थिक चुनौतियों के बीच विकास की नई राह तय करने वाला दस्तावेज साबित हो सकता है और देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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