बिलासपुर: गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) के BA-LLB छठे सेमेस्टर की परीक्षा को लेकर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। छात्रों के लगातार विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 27 जुलाई को होने वाली री-एग्जाम की घोषणा वापस ले ली है। लेकिन छात्रों का कहना है कि सिर्फ परीक्षा रद्द करना काफी नहीं है। वे मांग कर रहे हैं कि पेपर लीक मामले की जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यही वजह है कि यह मुद्दा छात्रों, उनके अभिभावकों और उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
छात्रों के विरोध के बाद बदला विश्वविद्यालय का फैसला
परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के चलते कुछ महीने पहले BA-LLB की परीक्षा रद्द कर दी गई थी, और फिर 27 जुलाई को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। जैसे ही री-एग्जाम का नोटिफिकेशन जारी हुआ, छात्रों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।
छात्रों ने कहा कि उन्हें फिर से परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। पहले तो उन्होंने विभागाध्यक्ष और फिर विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ बातचीत की, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला, तो बड़ी संख्या में छात्र प्रशासनिक भवन पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे। छात्रों के लगातार बढ़ते विरोध को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने री-एग्जाम की अधिसूचना वापस लेने का निर्णय लिया।
छात्रों की कुछ प्रमुख मांगें हैं
- फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
- पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- जांच पूरी होने तक पारदर्शिता बनी रहे।
- अगली परीक्षा की नई तारीख छात्रों से चर्चा के बाद तय की जाए।
पेपर लीक जांच में क्या हुआ?
जानकारी के अनुसार, पेपर लीक मामले की जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय समिति ने 6 जून को अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि समर्थ पोर्टल को हैक नहीं किया गया था, बल्कि प्रश्नपत्र और अन्य गोपनीय डेटा तक पहुंच प्राप्त करने के लिए लॉगिन ID और पासवर्ड का दुरुपयोग किया गया था। समिति ने मामले की पुलिस जांच कराने की सिफारिश की है।
हालांकि रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद उससे संबंधित कोई सार्वजनिक कार्रवाई नहीं हुई थी। इसके बाद परीक्षा निरस्त करने और री-एग्जाम कराने का फैसला लिया गया, जिस पर छात्रों ने फिर सवाल उठाए। अब विश्वविद्यालय ने जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए एक विभागीय जांच समिति भी गठित कर दी है।
विश्वविद्यालय की कार्रवाई और आगे क्या होगा?
अब विश्वविद्यालय प्रशासन पहले ही लॉ विभाग के तत्कालीन डीन और एचओडी को उनके पद से हटा चुका है। री-एग्जाम की अधिसूचना भी वापस ले ली गई है। मगर छात्रों का कहना है कि जब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा।
अब तक की बड़ी बातें:
- BA-LLB छठे सेमेस्टर का री-एग्जाम नोटिफिकेशन रद्द किया गया।
- छात्रों के विरोध के बाद विश्वविद्यालय का फैसला बदला।
- पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पहले ही सौंपी जा चुकी है।
- समर्थ पोर्टल हैक नहीं हुआ, बल्कि लॉगिन क्रेडेंशियल का दुरुपयोग किया गया है।
- पुलिस जांच की सिफारिश और विभागीय जांच जारी।
GGU का यह मामला सिर्फ री-एग्जाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है। छात्रों की मांग है कि पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए। सभी की नजरें अब इस पर हैं कि विश्वविद्यालय इस मामले में क्या नया निर्णय लेता है। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।


