रायपुर, 19 दिसंबर 2025।
छत्तीसगढ़ सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लेते हुए राज्य में प्रचलित सलामी गार्ड (गार्ड ऑफ ऑनर) की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। गृह (सामान्य) विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह निर्णय औपनिवेशिक मानसिकता से जुड़ी परंपराओं को समाप्त करने और पुलिस बल की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
गृह विभाग के मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राज्य शासन द्वारा सलामी की वर्तमान प्रक्रिया की समीक्षा के बाद यह पाया गया कि यह व्यवस्था औपनिवेशिक प्रणाली की प्रतीक है और आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसकी आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही पुलिस बल को इस औपचारिकता से मुक्त कर उन्हें अपने मूल कर्तव्यों पर अधिक केंद्रित करने का निर्णय लिया गया है।
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दौरे और निरीक्षण के दौरान नहीं दी जाएगी सलामी
आदेश के अनुसार अब राज्य के भीतर सामान्य दौरों, आगमन, प्रस्थान एवं निरीक्षण के दौरान किसी भी अधिकारी को सलामी गार्ड नहीं दिया जाएगा। इसमें राज्य के माननीय गृहमंत्री, सभी मंत्रीगण, पुलिस महानिदेशक सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। जिला भ्रमण, दौरा या निरीक्षण के समय पहले से चली आ रही सलामी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
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राष्ट्रीय पर्वों पर अपवाद रहेगा लागू
हालांकि, कुछ विशेष अवसरों पर इस आदेश से छूट दी गई है। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), शहीद पुलिस स्मृति दिवस (21 अक्टूबर) और राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर) जैसे राष्ट्रीय एवं राजकीय समारोहों में औपचारिक सलामी गार्ड पूर्ववत दी जाती रहेगी। इसके अलावा अन्य राजकीय समारोहों और पुलिस दीक्षांत परेड में भी सलामी की व्यवस्था यथावत रहेगी।
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संवैधानिक पदों पर व्यवस्था यथावत
संवैधानिक पदों पर आसीन महानुभावों एवं विशिष्ट अतिथियों के लिए प्रोटोकॉल के तहत सलामी गार्ड की व्यवस्था पूर्व की तरह जारी रहेगी। इस निर्णय से संवैधानिक मर्यादाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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आधुनिक और लोकतांत्रिक सोच की दिशा में कदम
सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधार और लोकतांत्रिक मूल्यों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे पुलिस बल को औपचारिकताओं से राहत मिलेगी और वे कानून व्यवस्था, जनसुरक्षा और सेवा के कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
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यह आदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से जारी किया गया है और इसे गृह विभाग के उप सचिव श्रीकांत वर्मा द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित किया गया है।
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छत्तीसगढ़ में यह निर्णय औपनिवेशिक विरासत से बाहर निकलकर आधुनिक शासन व्यवस्था की ओर बढ़ने का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।


