रायपुर | छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण और स्वास्थ्य की अलख जगाने वाली महिलाओं की संख्या ने अब एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत अमला अब एक विशाल नेटवर्क में तब्दील हो चुका है। पूरे प्रदेश में 1,668 पर्यवेक्षक, 52,264 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 51,497 सहायिकाएं अपनी सेवाओं के माध्यम से सुदूर इलाकों तक शासन की योजनाओं को पहुँचा रही हैं।
प्रदेश में गठित हुए 38 हजार से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह
डेटा के गहन विश्लेषण से यह बात उभरकर सामने आई है कि जशपुर जिला प्रदेश में सबसे मजबूत नेटवर्क के साथ शीर्ष पर बना हुआ है, जहाँ अकेले 4,000 से अधिक कार्यकर्ता तैनात हैं। वहीं रायगढ़, कोरबा और जशपुर जैसे जिलों में पर्यवेक्षकों और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि इन क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर निगरानी और क्रियान्वयन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। बिलासपुर और रायपुर जैसे मैदानी जिलों में भी करीब 2,000 के आसपास कार्यकर्ताओं की सक्रिय मौजूदगी पोषण अभियान को गति दे रही है।
राशन दुकानों से लेकर आंगनबाड़ी तक महिलाओं का दबदबा, मानदेय और प्रबंधन में बड़े बदलाव
आंकड़ों की इस पारदर्शिता से यह भी स्पष्ट होता है कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक, वनांचलों की विषम परिस्थितियों के बावजूद आंगनबाड़ी सहायिकाओं और कार्यकर्ताओं की संख्या लगभग बराबरी पर बनी हुई है। कुल मिलाकर 1,05,429 से अधिक समर्पित महिलाएं प्रदेश के भविष्य यानी बच्चों के स्वास्थ्य और कुपोषण मुक्ति के संकल्प को पूरा करने में दिन-रात जुटी हुई हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के पास नहीं है स्कूल छोड़ने वाली बच्चियों का जिलावार डेटा

