रायपुर, 4 जुलाई। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और आस-पास के इलाकों में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे मध्यम वर्ग को इस मानसून में दोहरा झटका लगा है। एक तरफ जहां कम बारिश की वजह से भवन निर्माण की रफ्तार आधी रह गई है, वहीं दूसरी तरफ निर्माण सामग्री (कन्स्ट्रक्शन मटेरियल) की कीमतों में आई भारी तेजी ने आम लोगों से लेकर बड़े बिल्डरों तक के पसीने छुड़ा दिए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मार्केट में मांग (डिमांड) कम होने के बावजूद सीमेंट, सरिया और रेत के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
सिंडिकेट और अवैध डंपिंग का खेल: 21 हजार के पार पहुंची रेत
अनलॉक मार्केट और प्रशासन की ढील का फायदा उठाकर रेत माफिया और ठेकेदारों ने अपना सिंडिकेट बना लिया है। 16 अक्टूबर तक नदियों के घाटों से अधिकृत खनन बंद होने का फायदा उठाकर डंप की गई रेत पर मनमानी वसूली की जा रही है।
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3 गुना बढ़े दाम: एक महीने पहले जो 600 फीट रेत 10 से 11 हजार रुपये में मिलती थी, वह अब 19 से 21 हजार रुपये तक बिक रही है। बारीक और मीडियम रेत की कीमत तो 25 हजार रुपये प्रति हाईवा तक पहुंच गई है।
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अवैध वसूली का खेल: रेत सप्लायर्स का आरोप है कि ठेकेदार डंप से एक गाड़ी लोड करने के एवज में ही 5,000 से 6,000 रुपये की अलग से ‘गुंडा टैक्स’ जैसी वसूली कर रहे हैं। अगर नियमानुसार लोडिंग हो, तो यही रेत 7 से 8 हजार रुपये में मिल सकती है। इसके साथ ही कुरुद, कुटेला और धमतरी के घाटों पर रात के अंधेरे में मशीनों से अवैध उत्खनन भी धड़ल्ले से जारी है।
सीमेंट और सरिया की कीमतों ने बिगाड़ा बजट
आमतौर पर बारिश के दिनों में मांग घटने से दाम कम होते हैं, लेकिन इस बार बाजार का नियम ही बदल गया है:
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सीमेंट की छलांग: पिछले साल मानसून में 260 से 280 रुपये मिलने वाली सीमेंट की बोरी अब 380 रुपये की ऊंचाई छू रही है। वहीं, कुछ ब्रांडेड सीमेंट 310 से 320 रुपये प्रति बोरी बिक रहे हैं।
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सरिया के तीखे तेवर: मांग की कमी के बाद भी बाजार में 8 एमएम का सरिया 80 रुपये किलो और 10 से 12 एमएम का सरिया 91 रुपये प्रति किलो की रिकॉर्ड कीमत पर बिक रहा है।
ठेके पर घर बनाना भी पड़ा भारी, लागत ₹1,800 वर्गफीट के पार
बढ़ती महंगाई को देखते हुए लोग अब दैनिक मजदूरी के बजाय ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) पर काम देना बेहतर समझ रहे हैं, लेकिन वहाँ भी राहत नहीं है। सिर्फ बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) खड़ा करने के लिए ठेकेदार 1,100 से 1,200 रुपये प्रति वर्गफीट ले रहे हैं। इसके बाद बिजली, सेनेटरी, टाइल्स और पीओपी का काम जोड़कर एक सामान्य मकान बनाने की कुल लागत 1,600 से 1,800 रुपये प्रति वर्गफीट तक पहुंच गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक, रायपुर में जून के महीने में सामान्य (193.5 मिमी) के मुकाबले सिर्फ 66.50 मिमी बारिश हुई है। कम बारिश और बेकाबू महंगाई के इस गठजोड़ ने छोटे मकानों के निर्माण को पूरी तरह ठप कर दिया है और लोग अब कीमतें घटने के इंतजार में मजदूरों की संख्या घटाकर काम को टाल रहे हैं।

