नई दिल्ली | 28 मार्च 2026
भारत सरकार ने देश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए अपनी व्यापक रणनीति का खुलासा किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में देश में 13,88,185 पंजीकृत एलोपैथिक डॉक्टर और 7,51,768 पंजीकृत आयुष चिकित्सक सेवा दे रहे हैं। यदि इन डॉक्टरों की 80 प्रतिशत उपलब्धता को आधार माना जाए, तो देश में अब डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:811 के स्तर पर पहुँच गया है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों की दिशा में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। सरकार का मुख्य ध्यान अब शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरदराज के अंचलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित करना है।
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ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने ‘नेशनल हेल्थ मिशन’ के तहत डॉक्टरों के लिए कई आकर्षक और वित्तीय प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं। दुर्गम क्षेत्रों में काम करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों को अब ‘जटिल क्षेत्र भत्ता’ और बेहतर आवासीय सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा, राज्यों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए उनकी मांग के अनुसार वेतन तय कर सकें, जिसे “यू कोट, वी पे” (You Quote, We Pay) जैसी लचीली रणनीति का नाम दिया गया है। इतना ही नहीं, जो डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देंगे, उन्हें पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) पाठ्यक्रमों के प्रवेश में विशेष वरीयता दी जाएगी, जिससे युवाओं को इन क्षेत्रों में काम करने का प्रोत्साहन मिलेगा।
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डॉक्टरों की संख्या में स्थाई बढ़ोत्तरी के लिए केंद्र सरकार ने मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को भी ऐतिहासिक विस्तार दिया है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत अब तक देश भर में 157 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है, जिन्हें जिला और रेफरल अस्पतालों को उन्नत बनाकर स्थापित किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों में अनुभवी शिक्षकों की कमी न हो, इसके लिए फैकल्टी की नियुक्ति की आयु सीमा बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है। साथ ही, एमबीबीएस के छात्रों के लिए ‘परिवार दत्तक ग्रहण कार्यक्रम’ शुरू किया गया है, जिसके तहत छात्र गांवों के परिवारों को गोद लेकर उनकी नियमित स्वास्थ्य निगरानी करेंगे। वहीं, पीजी छात्रों के लिए जिला अस्पतालों में तीन महीने का अनिवार्य प्रशिक्षण (जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम) लागू किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को तत्काल विशेषज्ञ सेवाएं मिल रही हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए रिक्त पदों को भरने की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, जिसमें केंद्र उन्हें हर संभव वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।
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