रायपुर/CG Now:
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को हुनरमंद बनाने की योजना ‘व्यावसायिक शिक्षा’ (Vocational Education) खुद ही बीमार नज़र आ रही है।
विधानसभा सत्र के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। आंकड़ों के मुताबिक, पूरे प्रदेश के स्कूलों में व्यावसायिक प्रशिक्षकों (Vocational Trainers) के कुल 499 पद रिक्त पड़े हैं, जिससे छात्रों के कौशल प्रशिक्षण पर सीधा असर पड़ रहा है।
बिलासपुर और रायपुर जैसे बड़े जिलों में हाल बेहाल:
शिक्षा विभाग की सूची के अनुसार, न्यायधानी बिलासपुर में सबसे अधिक 48 पद खाली हैं। वहीं राजधानी रायपुर में भी स्थिति अच्छी नहीं है, यहाँ स्वीकृत पदों के मुकाबले 34 प्रशिक्षकों की कमी है। बलौदाबाजार (37 पद), बलरामपुर (33 पद) और मुंगेली (29 पद) जैसे जिलों में भी रिक्तियों की संख्या काफी ज्यादा है, जो यह बताती है कि ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में प्रशिक्षकों की भारी किल्लत है।
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जिलों की स्थिति पर एक नज़र (प्रमुख आंकड़े):
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बिलासपुर: 48 रिक्त पद
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बलौदाबाजार: 37 रिक्त पद
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रायपुर: 34 रिक्त पद
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बलरामपुर: 33 रिक्त पद
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जशपुर: 19 रिक्त पद
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दुर्ग: 19 रिक्त पद
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नारायणपुर: एकमात्र जिला जहाँ 0 रिक्त पद हैं। पूरी जिलेवार सूची यहाँ देखें:
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व्यावसायिक शिक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगारोन्मुखी कौशल सिखाना है। लेकिन जब सिखाने वाले ही नहीं होंगे, तो छात्र हुनरमंद कैसे बनेंगे? सदन में इन आंकड़ों के सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार इन रिक्त पदों को भरने के लिए जल्द ही नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगी या अतिथि प्रशिक्षकों के भरोसे ही काम चलाया जाएगा?
प्रदेश में कुल कार्यरत प्रशिक्षकों की संख्या 2071 है, जबकि 499 पद खाली होने के कारण कई स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। विभाग के इन आंकड़ों ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक और बड़ा मौका दे दिया है।