छत्तीसगढ़ में मदिरा प्रेमियों की सुविधा और राजस्व वृद्धि के लिए शराब दुकानों के स्वरूप और संख्या में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। आबकारी विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में संचालित मदिरा दुकानों की कुल संख्या पिछले चार वर्षों में 672 से बढ़कर 689 हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ परंपरागत रूप से अलग-अलग चलने वाली देशी और विदेशी शराब दुकानों की संख्या में कमी आई है, वहीं ‘कम्पोजिट’ और ‘प्रीमियम’ दुकानों की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया गया है। साझा किए गए दस्तावेजों के अनुसार सरकार अब ऐसी दुकानों पर अधिक जोर दे रही है जहाँ एक ही छत के नीचे विभिन्न श्रेणियों की मदिरा उपलब्ध हो सके, यही कारण है कि ‘कम्पोजिट विदेशी मदिरा’ दुकानों की संख्या जो वर्ष 2022-23 में मात्र 1 थी, वह 12 जनवरी 2026 तक बढ़कर 139 पहुँच गई है।
दुकानों के इस नए ढांचे का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि विभाग अब पारंपरिक दुकानों को अपग्रेड कर रहा है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022-23 में देशी शराब की 172 दुकानें थीं जो अब घटकर 125 रह गई हैं और इसी तरह विदेशी शराब की स्वतंत्र दुकानें भी 303 से घटकर 166 हो गई हैं। इसके विपरीत देशी और विदेशी दोनों शराब एक साथ बेचने वाली कम्पोजिट दुकानों की संख्या में सबसे बड़ी वृद्धि हुई है, जहाँ कम्पोजिट देशी दुकानें 169 से बढ़कर 215 और कम्पोजिट विदेशी दुकानें लगभग 140 गुना बढ़कर 139 हो गई हैं। साथ ही उच्च श्रेणी के शौकीनों के लिए प्रीमियम दुकानों की संख्या भी 27 से बढ़ाकर 44 कर दी गई है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि दुकानों की श्रेणी में यह बदलाव ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने और अवैध बिक्री पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए किया गया है। एक ही स्थान पर सभी ब्रांड्स और श्रेणियां उपलब्ध होने से न केवल ग्राहकों को चुनाव करने में आसानी होती है, बल्कि विभाग को भी स्टॉक और बिक्री पर डिजिटल निगरानी रखने में सुविधा मिलती है। 12 जनवरी 2026 तक के ये ताजा आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि छत्तीसगढ़ का आबकारी मॉडल अब ‘कम्पोजिट और प्रीमियम दुकानों’ की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बाजार का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है।
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