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तंत्र-मंत्र के नाम पर तीन लोगों की रहस्यमय मौत के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। कथित बैगा ने कमरे के भीतर लक्ष्मण रेखा खींचकर बाहर खड़े लोगों को चेतावनी दी थी कि कोई भी व्यक्ति इसे लांघकर अंदर न आए, वरना अनर्थ हो जाएगा। इसी अंधविश्वास के चलते सभी लोग बाहर खड़े रहे और बैगा एक-एक कर लोगों को अंदर बुलाकर मौत का खेल खेलता रहा।

पुलिस ने इस मामले में तंत्र-मंत्र करने वाले चार आरोपितों के साथ-साथ दो ऐसे लोगों को भी आरोपी बनाया है, जिन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए उकसाया था।

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पुलिस के दावे पर उठे सवाल

हालांकि पुलिस मामले को सुलझा लेने का दावा कर रही है, लेकिन कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। गला घोंटे जाने के दौरान निकलने वाली चीख किसी ने क्यों नहीं सुनी? फंदा कसे जाने पर किसी ने विरोध क्यों नहीं किया? इन सवालों का जवाब अभी तक सामने नहीं आ पाया है।

पुलिस ने क्या बताया?

तंत्र-मंत्र के कारण कबाड़ व्यवसायी अशरफ मेमन, दूध व्यवसायी सुरेश साहू और वाहन चालक नीतेश राठौर की मौत के मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतिश ठाकुर ने बताया कि बिलासपुर निवासी कथित बैगा आशीष दास (24 वर्ष) अपने साथ राजेंद्र जोगी (70), केशव सूर्यवंशी (55) और अश्वनी कुर्रे (42) के साथ तीन बाइकों पर कोरबा के कुदरी स्थित स्क्रैप यार्ड पहुंचा था।इससे पहले बुधवारी बाजार कोरबा से नींबू खरीदे गए थे, जबकि नायलॉन की रस्सी लोरमी से मंगाई गई थी।

एक-एक कर अंदर बुलाकर की हत्या

बाद में सीपत थाना क्षेत्र के मोदर गांव निवासी संजय साहू (46) और मुड़ापार निवासी भागवत महंत (48) भी बाइक से यार्ड पहुंचे। वहीं सुरेश साहू, अशरफ मेमन, उसके दो बेटे, भांजा और चालक कार से पहुंचे।यार्ड के भीतर एक कमरे में बैगा आशीष दास ने लकड़ी से घेरा बनाते हुए कहा कि उसकी अनुमति के बिना कोई अंदर नहीं आएगा। इसके बाद वह एक-एक व्यक्ति को कमरे में बुलाता गया और फंदा डालकर उनकी हत्या कर दी।

बाहर खड़े लोग खींचते थे रस्सी

पुलिस के अनुसार कमरे के बाहर निकली रस्सी को बैगा के कहने पर राजेंद्र, केशव और अश्वनी पूरी ताकत से खींचते थे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि फंदा कसने के दौरान किसी तरह की कोई चीख कमरे के बाहर सुनाई नहीं दी। बाहर मौजूद सभी लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं, लेकिन किसी ने भी अंदर से किसी गतिविधि की जानकारी होने से इनकार किया है।

क्या इंजेक्शन से किया गया बेहोश?

अब आशंका जताई जा रही है कि बैगा ने मृतकों को इंजेक्शन देकर पहले बेहोश किया हो। हालांकि पुलिस के पास फिलहाल इसका कोई ठोस जवाब नहीं है। अशरफ मेमन के भाई इमरान मेमन ने हाथ के पास इंजेक्शन के निशान मिलने का दावा किया है, जिससे इस आशंका को बल मिला है।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उठेगा पर्दा

पुलिस का कहना है कि विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत से पहले पीड़ितों को बेहोश किया गया था या नहीं।

24 साल के बैगा ने उम्रदराज लोगों को झांसे में लिया

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी राजेंद्र जोगी का बिलासपुर में मेडिकल स्टोर है, जहां केशव सूर्यवंशी और अश्वनी कुर्रे का आना-जाना था। पिछले चार सालों से ये लोग हंडा (गड़ा धन) की तलाश में थे। इसी दौरान अश्वनी ने तंत्र-मंत्र में माहिर आशीष दास की जानकारी दी।महज 24 साल के इस कथित बैगा ने सभी को अपने झांसे में ले लिया और पांच लाख रुपये को ढाई गुना करने के लालच में तीन लोगों की जान चली गई।

पैसे लेकर भागने की थी योजना

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बैगा गिरोह की योजना पैसे लेकर भाग जाने की थी। पहले यह कहा गया था कि सुरेश साहू ने पांच लाख रुपये दिए थे, लेकिन जांच में सामने आया कि उसने केवल एक लाख रुपये दिए थे, जबकि शेष चार लाख रुपये अशरफ मेमन ने दिए थे।

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