रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश में सरकारी शिक्षक बनने का सपना संजोए युवाओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। हाल ही में जारी 31 जनवरी 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर के रोजगार कार्यालयों में कुल 46,207 बी.एड. और डी.एल.एड. डिग्री धारी अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। इन आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि राज्य में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार के लिए जबरदस्त प्रतिस्पर्धा होने वाली है क्योंकि अकेले बी.एड. डिग्री धारियों की संख्या ही 34,842 तक पहुँच चुकी है, जबकि डी.एल.एड. या डी.एड. करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 11,365 दर्ज की गई है।
क्षेत्रवार स्थिति पर गौर करें तो दुर्ग जिला इस सूची में सबसे ऊपर आता है जहाँ अकेले 6,729 बी.एड. प्रशिक्षित युवा रोजगार की तलाश में हैं। इसके बाद धमतरी में 2,899 और राजधानी रायपुर में 2,525 अभ्यर्थियों ने अपना पंजीकरण कराया है। बिलासपुर और बलौदाबाजार जैसे बड़े जिलों में भी यह संख्या दो हजार के पार बनी हुई है। इसके विपरीत बस्तर संभाग के जिलों जैसे नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा में यह आंकड़ा तुलनात्मक रूप से काफी कम है, जो क्षेत्रीय असंतुलन को भी दर्शाता है। विशेष रूप से नारायणपुर में सबसे कम केवल 29 अभ्यर्थी ही पंजीकृत पाए गए हैं।
इन आंकड़ों से एक और महत्वपूर्ण बात निकलकर सामने आती है कि युवाओं के बीच बी.एड. डिग्री के प्रति रुझान डी.एल.एड. की तुलना में तीन गुना से भी अधिक है। बालोद जैसे जिलों में तो बी.एड. धारियों की संख्या 1,247 है जबकि वहां डी.एल.एड. करने वाले महज 82 युवा ही पंजीकृत हैं। शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के बाद अब इन हजारों युवाओं की निगाहें राज्य सरकार द्वारा निकाली जाने वाली आगामी शिक्षक भर्ती की घोषणा पर टिकी हुई हैं, ताकि वर्षों की मेहनत और डिग्री का सही उपयोग हो सके।


