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नई दिल्ली/रायपुर, 1 अप्रैल 2026 — भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संचालित ‘इंस्पायर’ योजना आज देश के कोने-कोने में वैज्ञानिक चेतना जागृत करने का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। स्कूली स्तर से लेकर उन्नत शोध तक फैली यह राष्ट्रीय पहल न केवल प्रतिभाशाली युवाओं को बुनियादी विज्ञान की ओर आकर्षित कर रही है, बल्कि इंजीनियरिंग, चिकित्सा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश के अनुसंधान आधार को भी अभूतपूर्व मजबूती प्रदान कर रही है।
इस महत्वाकांक्षी अभियान की सबसे बड़ी सफलता इसके ‘इंस्पायर-मानक’ घटक में देखने को मिली है, जो कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों के मौलिक विचारों को मंच प्रदान करता है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस योजना की पहुंच का दायरा साल-दर-साल तेजी से बढ़ रहा है। जहां वर्ष 2023-24 में देश भर के लगभग 8.5 लाख छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया था, वहीं वर्ष 2025-26 तक यह भागीदारी बढ़कर 11.47 लाख से अधिक हो गई है।
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छत्तीसगढ़ में विज्ञान के प्रति बढ़ता उत्साह
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती इस भागीदारी में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रदर्शन भी काफी सराहनीय रहा है। राज्य के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छात्रों ने वैज्ञानिक नवाचारों में गहरी रुचि दिखाई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ में ‘इंस्पायर-मानक’ योजना के तहत वर्ष 2023-24 में 3,157 छात्र लाभान्वित हुए थे। हालांकि अगले वर्षों में यह संख्या 2,165 के आसपास रही, लेकिन उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य के छात्रों ने लंबी छलांग लगाई है।
छत्तीसगढ़ में ‘इंस्पायर-SHE’ (उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति) के तहत लाभ लेने वाले छात्रों की संख्या में निरंतरता बनी हुई है, जहाँ प्रतिवर्ष औसतन 250 से अधिक मेधावी छात्रों को ₹80,000 की वार्षिक छात्रवृत्ति मिल रही है ताकि वे विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई सुचारू रूप से कर सकें। इसके अलावा, राज्य के शोधार्थी ‘इंस्पायर फेलोशिप’ और ‘फैकल्टी फेलोशिप’ के माध्यम से पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल स्तर पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल वैज्ञानिक भविष्य का संकेत है।
नवाचार और मार्गदर्शन का सशक्त तंत्र
सरकार ने केवल आर्थिक सहायता तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि इन बाल वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन के लिए एक व्यापक तंत्र भी विकसित किया है। चयनित छात्रों को सीधे उनके बैंक खातों में ₹10,000 की राशि भेजी जाती है ताकि वे अपने वैज्ञानिक विचारों का प्रोटोटाइप (मॉडल) तैयार कर सकें। इन छात्रों को आईआईटी (IIT) और एनआईटी (NIT) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों से प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है।
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साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नवाचारों के लिए पेटेंट दाखिल करने में भी सरकार मदद कर रही है, ताकि छात्रों के छोटे-छोटे विचार भविष्य में बड़े सामाजिक बदलाव का जरिया बन सकें। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहाँ कृषि और वन संपदा की प्रचुरता है, वहाँ के छात्रों के मौलिक विचार स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
कुल मिलाकर, इंस्पायर योजना स्कूली प्रतिभाओं को तराशने से लेकर उन्हें एक सफल वैज्ञानिक बनाने तक का एक सेतु बन गई है, जो आने वाले समय में भारत के साथ-साथ छत्तीसगढ़ को भी विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
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