रायपुर/CG Now: छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी ने अभी दस्तक दी ही है कि ग्रामीण अंचलों में पेयजल व्यवस्था को लेकर एक डराने वाली तस्वीर सामने आई है। विधानसभा में पेश किए गए ताजा सरकारी आंकड़ों ने खुलासा किया है कि प्रदेश के सुदूर इलाकों में हैंडपंपों की मरम्मत का जिम्मा संभालने वाले ‘हैंडपंप तकनीशियनों’ की भारी कमी है। विडंबना यह है कि जहाँ सरकार हर घर नल से जल पहुँचाने का दावा कर रही है, वहीं ज़मीनी स्तर पर बुनियादी हैंडपंपों को सुधारने वाला अमला ही गायब है।
सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, पूरे छत्तीसगढ़ में हैंडपंप तकनीशियनों के कुल स्वीकृत 876 पदों में से लगभग 47% पद खाली पड़े हैं। वर्तमान में केवल 462 कर्मचारी ही फील्ड पर कार्यरत हैं, जबकि 414 पदों पर भर्ती की दरकार है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आने वाले दिनों में किसी गाँव का हैंडपंप खराब होता है, तो उसे सुधारने के लिए सरकारी मैकेनिक मिलने में हफ़्तों लग सकते हैं।

जिलों की स्थिति और बढ़ता खतरा: आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों में स्थिति सबसे ज्यादा भयावह है। कांकेर जिले में स्वीकृत 41 पदों में से 26 पद रिक्त हैं, वहीं जशपुर में 48 में से 22 पदों पर कोई कर्मचारी नहीं है। इसी तरह रायगढ़ जैसे बड़े जिले में भी 42 में से 23 पद खाली पड़े हैं। राजधानी रायपुर और औद्योगिक जिला दुर्ग भी इस कमी से अछूते नहीं हैं, जहाँ मैदानी अमले की कमी के कारण जल संकट गहराने की पूरी आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हैंडपंप तकनीशियनों के इन रिक्त पदों की वजह से जल जीवन मिशन और अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर दबाव कई गुना बढ़ जाएगा। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी करते हुए सवाल उठाया है कि क्या सरकार गर्मी बढ़ने से पहले इन रिक्त पदों पर संविदा या नई भर्ती के जरिए अमले की तैनाती करेगी?
बजट सत्र में पेश यह कुंडली साफ़ संकेत दे रही है कि यदि समय रहते इन तकनीकी पदों को नहीं भरा गया, तो छत्तीसगढ़ के हजारों गाँवों में बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मच सकता है। अब जनता की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या गर्मी की तपिश से पहले इस ‘सिस्टम की प्यास’ को बुझाया जा सकेगा?

