रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से प्रस्तुत किए गए आंकड़ों ने राज्य में किशोर न्याय व्यवस्था की सक्रियता की एक सकारात्मक तस्वीर पेश की है। विधायक अजय चंद्राकर के सवाल का जवाब देते हुए विभागीय मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि प्रदेश के 27 जिलों में किशोर न्याय बोर्ड का सुचारू संचालन किया जा रहा है। इन बोर्डों ने पिछले दो वर्षों में बड़ी सफलता हासिल करते हुए कुल 13,784 मामलों का निपटारा किया है, जो बच्चों के पुनर्वास और न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, प्रत्येक बोर्ड का गठन बेहद व्यवस्थित तरीके से किया गया है। इसकी कमान उच्च न्यायालय द्वारा नामित प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के हाथों में होती है, जिन्हें प्रधान मजिस्ट्रेट कहा जाता है। इनके साथ विभाग द्वारा नियुक्त दो अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल होते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति तीन वर्ष के निश्चित कार्यकाल के लिए की जाती है, जबकि प्रधान मजिस्ट्रेट की सेवा शर्तें और अवधि उच्च न्यायालय द्वारा तय की जाती है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन बोर्डों की प्राथमिकता केवल कानूनी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों के सर्वोत्तम हित को सुरक्षित करना है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन बच्चों को सुधार का अवसर देकर समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है। इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने आवर्ती और अनावर्ती मदों के माध्यम से पर्याप्त बजट का आवंटन भी सुनिश्चित किया है। सदन के पटल पर रखे गए दस्तावेजों में बोर्ड के सदस्यों की शक्तियों, योग्यताओं और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं का भी विस्तृत विवरण दिया गया है, जो राज्य में बाल अधिकारों के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

