रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में जशपुर जिले के विकास कार्यों को लेकर गहन चर्चा हुई। क्षेत्रीय विधायकों ने शिक्षा, कृषि, पर्यटन और गौ-संरक्षण जैसे गंभीर विषयों पर सरकार को घेरा, जिसके जवाब में संबंधित मंत्रियों ने विभागवार वस्तुस्थिति स्पष्ट की।
शिक्षा और छात्रावासों की स्थिति
जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने आदिवासी छात्रों की सुविधाओं पर सवाल उठाया। इसके जवाब में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने जानकारी दी कि जशपुर विधानसभा क्षेत्र में छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 07 नए छात्रावास भवन बनकर तैयार हो चुके हैं और 09 अन्य भवनों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। साथ ही, बगीचा विकासखंड के कलिया ग्राम में जर्जर हो चुके छात्रावास को तोड़कर नया भवन बनाने की आवश्यकता को सरकार ने स्वीकार किया है। छात्रों को दी जाने वाली सहायता पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्री-मैट्रिक छात्रों को 1500 रुपये और पोस्ट-मैट्रिक छात्रों को 1200 रुपये प्रतिमाह की शिष्यवृत्ति व सहायता राशि दी जा रही है।
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पर्यटन और मंदिरों का जीर्णोद्धार
पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय ने अपने क्षेत्र के मंदिरों के जीर्णोद्धार और पर्यटन स्थलों के विकास का मुद्दा उठाया। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने जवाब देते हुए बताया कि शारदा धाम मंदिर (दुलदुला) को आधिकारिक तौर पर पर्यटन स्थल घोषित कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 से अब तक मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए अलग से कोई नई राशि स्वीकृत नहीं की गई है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि कोसलापाठ (तमता पहाड़) और मयाली बगीचा में चल रहे विकास कार्यों को मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाएगा।
कृषि, मत्स्य पालन और गौ-संरक्षण
विधायक रायमुनी भगत के एक अन्य सवाल पर मंत्री रामविचार नेताम ने मत्स्य पालन और कृषि उपकरणों का ब्योरा पेश किया। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 42 व्यक्तिगत हितग्राहियों के लिए तालाबों का निर्माण कराया गया है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कृषि विभाग द्वारा बगीचा, जशपुर और मनोरा विकासखंडों में इस अवधि के दौरान किसी भी समूह को कृषि यंत्र उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
क्षेत्र में गौ-संरक्षण की स्थिति पर मंत्री ने खुलासा किया कि जशपुर विधानसभा में वर्तमान में केवल दो अपंजीकृत गौशालाएं गोपाल कृष्ण और जय कृष्ण संचालित हैं और छत्तीसगढ़ राज्य गौ-सेवा आयोग के पास क्षेत्र की किसी भी पंजीकृत संस्था की जानकारी उपलब्ध नहीं है। साथ ही, पशुपालन सब्सिडी के लाभार्थियों की संख्या भी पिछले साल के मुकाबले 462 से घटकर 227 रह गई है।


