जशपुर के सरना एथनिक रिसॉर्ट को मिला प्रतिष्ठित ‘ग्रीन लीफ अवॉर्ड’
सूफी संगीत और कव्वाली की सदियों पुरानी परंपरा में जहाँ अनुभव और उम्र को बड़ा पैमाना माना जाता है, वहीं अजमत आफताब शाबरी ने एक नई मिसाल पेश की है। महज़ बचपन की दहलीज पर खड़े इस कलाकार ने अपनी रूहानी आवाज़ और मंच पर अपने जादुई प्रभाव से यह साबित कर दिया है कि कला किसी उम्र की मोहताज नहीं होती।
बाल सुरक्षा पर सरकार का कड़ा रुख: 18 वर्ष से कम आयु में ‘सहमति’ का कोई स्थान नहीं
युवा वकीलों के लिए खुशखबरी: अब जूनियर अधिवक्ताओं को मिलेगा सम्मानजनक स्टाइपेंड
अजमत शाबरी के भीतर जो संगीत की लहरें उठती हैं, वे उन्हें विरासत में मिली हैं। मशहूर कव्वाल आफताब शाबरी के बेटे होने के नाते, उन्होंने सुरों के बीच ही अपनी आँखें खोलीं। उनके नाम के साथ जुड़ा ‘शाबरी’ शब्द ही उस महान परंपरा का प्रतीक है, जिसने कव्वाली को इबादत का दर्जा दिया है। पिरान कलियर शरीफ और अन्य खानकाहों से मिली आध्यात्मिक ऊर्जा उनके गायन में साफ़ झलकती है।
सरकारी स्कूलों में ‘कॉन्वेंट’ जैसा लुक: छत्तीसगढ़ के 60 लाख बच्चों को मिलेगी नई यूनिफॉर्म
Numerology: इन मूलांक वालों के पास आता है पैसा सबसे तेज़, कहीं आपका नंबर तो नहीं?
मंच का ‘छोटा उस्ताद’
अजमत को दुनिया “लिटिल रईस अनीस साबरी”लिटिल रईस अनीस साबरी” के नाम से भी जानती है। यह तुलना कोई छोटी बात नहीं है; रईस अनीस साबरी जैसी बुलंद आवाज़ और उनके कठिन आलापों की नकल करना बड़े-बड़े गायकों के बस की बात नहीं होती, लेकिन अजमत ने इसे अपनी सहजता बना लिया है। मंच पर जब वे हारमोनियम के पीछे बैठते हैं, तो उनकी ऊर्जा और तालियों की थाप के साथ सुरों का ऐसा संगम होता है कि सुनने वाले झूम उठते हैं।
माटी की धड़कन और ताल की पहचान लोक गीतों और लोक नृत्यों में बसती भारतीय संस्कृति की आत्मा
हिंसा से हुनर का सफर: बस्तर में बंदूक छोड़कर हुनरमंद हुए युवा
मुकाबलों का बेताज बादशाह
आज के दौर में जहाँ कव्वाली ‘मुकाबले’ के रूप में काफी लोकप्रिय है, अजमत ने कई स्थापित कलाकारों को कड़ी टक्कर दी है।
अब टॉपर्स और शिक्षक करेंगे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों का शैक्षणिक भ्रमण
अब टॉपर्स और शिक्षक करेंगे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों का शैक्षणिक भ्रमण
उन्होंने रईस अनीस साबरी जैसे दिग्गजों के साथ मंच साझा किया है।नेहा नाज़ और ज़ारा डिस्को जैसी प्रसिद्ध महिला कव्वालों के साथ उनके मुकाबले सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने रहते हैं। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे कव्वाली के दौरान केवल गाते नहीं हैं, बल्कि अपने चेहरे के भावों और हाथों के इशारों से कलाम के गहरे अर्थों को दर्शकों तक पहुँचाते हैं।
रूहानी कलाम और लोकप्रियता
अजमत के कलामों में एक तरफ जहाँ ‘इश्क-ए-इलाही’ (ईश्वर के प्रति प्रेम) झलकता है, वहीं दूसरी ओर वे मानवीय भावनाओं, खासकर ‘माँ’ की ममता पर आधारित कलामों के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं। उनके द्वारा गाई गई पंक्तियाँ जब हवाओं में तैरती हैं, तो महफिल में मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो जाती हैं।
अजमत आफताब शाबरी आज केवल एक ‘चाइल्ड आर्टिस्ट’ नहीं, बल्कि कव्वाली के भविष्य की एक उम्मीद बन चुके हैं। उनकी लोकप्रियता यह बताती है कि आज की नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों और सूफियाना कलामों से जुड़ना चाहती है। आने वाले समय में वे यकीनन सूफी संगीत की दुनिया के सबसे चमकदार सितारों में से एक होंगे।

