विशेष संवाददाता | रायपुर
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान जांजगीर-चांपा जिले के चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर के विकास और पर्यटन दर्जे को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है. विधायक श्री रामकुमार यादव द्वारा पूछे गए ध्यानाकर्षण प्रश्न का लिखित जवाब देते हुए प्रदेश के पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सदन को वस्तुस्थिति से अवगत कराया.
पर्यटन मंत्री ने साफ किया कि मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर को राज्य शासन द्वारा बहुत पहले ही ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल का दर्जा प्रदान किया जा चुका है.
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वर्ष 2004 में ही मिल चुका है धार्मिक पर्यटन स्थल का दर्जा
सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के कार्यालयीन आदेश क्रमांक 1521/प.मं./2004 दिनांक 09.06.2004 के माध्यम से मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर को ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल की श्रेणी में राज्य के चिन्हांकित स्थलों की सूची में शामिल किया गया था. यह मंदिर क्षेत्र के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है.
विगत दो वर्षों में नहीं मिली कोई राशि, लेकिन ‘शक्तिपीठ कॉरिडोर’ में शामिल
विधायक द्वारा पिछले दो वर्षों में मंदिर परिसर और आसपास के विकास हेतु स्वीकृत व व्यय की गई राशि के सवाल पर पर्यटन मंत्री ने बताया कि हाल के दो वर्षों में विभाग द्वारा इसके लिए कोई अलग से राशि स्वीकृत नहीं की गई है. हालांकि, पर्यटन मंत्री ने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘शक्तिपीठ कॉरिडोर सर्किट योजना’ के अंतर्गत प्रदेश के जिन 5 प्रमुख देवी मंदिरों का चयन किया गया है, उनमें चंद्रपुर का मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर भी शामिल है.
वर्तमान में इस शक्तिपीठ कॉरिडोर के एकीकृत विकास हेतु एक वृहद कार्ययोजना (प्रोजेक्ट प्लान) तैयार की जा रही है.
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योजना बनते ही शुरू होगा जमीनी काम
पर्यटन विभाग के अनुसार, मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर सहित पांचों प्रमुख देवस्थानों के विकास की विस्तृत योजना जैसे ही अंतिम रूप से तैयार हो जाएगी, उसके तुरंत बाद कॉरिडोर निर्माण का जमीनी क्रियान्वयन तेजी से शुरू कर दिया जाएगा. इससे न केवल श्रद्धालुओं को अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी एक नई ऊंचाई मिलेगी.



