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हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और व्रत करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साल 2026 की माघ पूर्णिमा बेहद खास है क्योंकि इस दिन रवि पुष्य योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इसे निवेश और खरीदारी के लिए भी अत्यंत शुभ बनाता है।
कब है माघ पूर्णिमा?
शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत प्रदोष काल की व्याप्ति के आधार पर रखा जाता है। इस वर्ष माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026, रविवार को मनाई जाएगी।
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पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 फरवरी, सुबह 05:53 बजे
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पूर्णिमा तिथि समापन: 1 फरवरी, मध्य रात्रि (2 फरवरी) 03:39 बजे
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विशेष संयोग: रविवार होने के कारण इस दिन ‘रवि पुष्य योग’ का निर्माण हो रहा है।
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स्नान-दान और चंद्रोदय का समय
माघ पूर्णिमा पर पितरों के निमित्त दान और चंद्रमा की पूजा का विधान है।
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स्नान-दान का शुभ मुहूर्त (लाभ चौघड़िया): सुबह 05:30 बजे से सुबह 07:09 बजे तक।
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चंद्रोदय का समय: शाम 05:46 बजे (इस समय चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ होगा)।
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क्या करें दान?
माघी पूर्णिमा पर इन वस्तुओं का दान करने से सुख-समृद्धि आती है:
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तिल और कंबल
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वस्त्र और घी
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फल और अन्न
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पूजन विधि: कैसे करें भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा
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संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्य देव को जल चढ़ाकर व्रत का संकल्प लें।
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स्थापना: पूजा घर में चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
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शुद्धिकरण: गंगाजल का छिड़काव करें और चौकी के चारों ओर कलावा बांधें।
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अभिषेक: विष्णु जी को पंचामृत से स्नान कराएं।
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भोग व आरती: भगवान को तिलक लगाएं, केले और कसाल (पंजीरी) का भोग लगाएं। अंत में व्रत कथा का पाठ कर आरती करें।
विशेष टिप: पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ना या सुनना विशेष फलदायी माना जाता है।
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