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जशपुर। जशपुर जिले की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कलेक्टर रोहित व्यास और विधायक श्रीमती रायमुनि भगत की विशेष मौजूदगी में जिले के पुरातत्व वैभव को नई पहचान देने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इस पहल के तहत जशपुर के उन सभी विकास खंडों में छिपे हुए ऐतिहासिक स्थलों का चिन्हांकन किया जाएगा, जो अब तक उपेक्षित थे, ताकि उन्हें पर्यटन और संरक्षण के मानचित्र पर लाया जा सके।
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प्रशासन की इस योजना में प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार सबसे प्रमुख है। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी चिन्हांकित पुराने मंदिरों की वर्तमान स्थिति का आकलन कर उनके पुनरुद्धार के लिए विस्तृत प्रस्ताव भेजे जाएं। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर इन धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों की सहभागिता ली जाएगी। जिन गांवों में प्राचीन स्मारक या स्थल मौजूद हैं, वहां पंचायतों के माध्यम से संरक्षण प्रस्ताव तैयार कर उन्हें सुरक्षित करने का काम किया जाएगा।
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विधायक श्रीमती रायमुनि भगत ने इस दौरान जशपुर की विशिष्ट पहचान से जुड़े स्थलों जैसे ग्वालिन सन्ना, देवकोना और तमता जैसे क्षेत्रों के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। चर्चा के दौरान खुड़िया रानी, भैरव पहाड़ मंदिर और रानी कम्बो जैसे प्रमुख आस्था केंद्रों की विशेषताओं पर भी विस्तार से मंथन हुआ। अब समिति के सदस्य इन पुरातत्व वाली जगहों का स्वयं अवलोकन करेंगे और वहां की ऐतिहासिक विशेषताओं का दस्तावेजीकरण करेंगे। इस पूरी कवायद का उद्देश्य जशपुर की गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है।



