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 बिलासपुर 

महासमुंद जिले के भंवरपुर परीक्षा केंद्र में हुए बहुचर्चित सामूहिक नकल मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा पेश किए गए हलफनामे (एफिडेविट) के बाद, कोर्ट ने उन्हें दोबारा एक ‘पर्सनल एफिडेविट’ (व्यक्तिगत शपथ पत्र) दाखिल करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगले शपथ पत्र में शिक्षा सचिव को दोषी अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच (डिपार्टमेंटल इंक्वायरी) की वर्तमान प्रोग्रेस और अब तक की गई कार्रवाई की बिंदुवार जानकारी देनी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि तब तक जांच पूरी हो जाती है, तो अंतिम फैसले के आदेश की प्रति भी रिकॉर्ड में लाई जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को तय की गई है।

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जांच में दोषी पाए गए इन 6 लोगों पर गिरी गाज

स्कूल शिक्षा सचिव द्वारा कोर्ट में सौंपे गए शपथ पत्र के अनुसार, भंवरपुर सेंटर पर हुई सामूहिक नकल की घटना की उच्चस्तरीय जांच के बाद कुल 6 लोगों को दोषी पाया गया है। इन सभी के खिलाफ चार्जशीट (आरोप पत्र) तैयार कर नोटिस जारी कर दिया गया है:

  • लेक्चरर (व्याख्याता): गंगा प्रसाद पटेल, अनिरुद्ध, आलोक भोई और दिनेश कुमार दास।

  • असिस्टेंट टीचर (सहायक शिक्षक): दुर्गा प्रसाद पटेल।

  • भृत्य (चतुर्थ वर्ग कर्मचारी): विजिया बुडेक।

नोटिस का जवाब आने के बाद इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

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छात्रा के साहसिक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ से खुला था महाघोटाला

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा मामला महासमुंद जिले के भंवरपुर परीक्षा केंद्र का है, जहां 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान नियमों को ताक पर रखकर परीक्षार्थियों को खुलेआम सामूहिक नकल कराई जा रही थी। वहां मौजूद नीता नाम की एक साहसिक छात्रा ने परीक्षा हॉल के भीतर चल रही इस अवैध गतिविधि का अपने स्तर पर एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ कर वीडियो रिकॉर्ड कर लिया था।

जब जिला स्तर पर नहीं हुई सुनवाई: छात्रा ने इस पुख्ता वीडियो क्लिप और सबूतों के साथ पहले जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों से शिकायत की थी। लेकिन जब स्थानीय स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास किया गया और कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्रा ने हार नहीं मानी। उसने सीधे माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) के मुख्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।

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कोर्ट की पैनी नजर, 15 अक्टूबर को अगली पेशी

हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए साफ कर दिया है कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अब 15 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में यह तय होगा कि शिक्षा विभाग ने इन दागी प्राध्यापकों और कर्मचारियों पर क्या अंतिम दंडात्मक कार्रवाई की है।

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