नई दिल्ली | 20 मार्च 2026
देश के आम नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने एक व्यापक कार्ययोजना लागू की है। औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO) 2013 के तहत अब जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों पर न केवल कड़ी निगरानी रखी जा रही है, बल्कि गैर-अनुसूचित दवाओं की कीमतों में एक साल के भीतर 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि पर भी रोक लगा दी गई है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण (NPPA) असाधारण परिस्थितियों में जनहित को ध्यान में रखते हुए दवाओं की कीमतें स्वयं निर्धारित कर रहा है, ताकि कोई भी कंपनी मनमानी कीमत न वसूल सके।
सरकार ने दवाओं की उपलब्धता और उनके किफायती होने को सुनिश्चित करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना सबसे प्रमुख है। वर्तमान में देश भर के 17,000 से अधिक जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत तक कम कीमतों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही ‘अमृत’ (AMRIT) फार्मेसी स्टोर्स के जरिए कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रत्यारोपण (Implants) और सर्जिकल सामान पर औसतन 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है।
गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए आयुष्मान भारत (AB-PMJAY) योजना एक बड़ा सुरक्षा कवच बनकर उभरी है, जिसमें अस्पताल में भर्ती होने पर दवाओं सहित 5 लाख रुपये तक का सालाना मुफ्त इलाज मिलता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक जरूरी दवाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले मरीजों के लिए ‘राष्ट्रीय आरोग्य निधि’ के माध्यम से वित्तीय सहायता भी दी जा रही है ताकि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का इलाज पैसों की कमी के कारण न रुके।
दवाओं की कमी को रोकने के लिए सरकार ने ‘फार्मा जन समाधान’ पोर्टल और हेल्पलाइन जैसे विभिन्न माध्यम विकसित किए हैं, जहां दवाओं की अनुपलब्धता की शिकायत मिलने पर तत्काल सुधारात्मक उपाय किए जाते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिक शुल्क वसूलने वाली कंपनियों के खिलाफ DPCO के प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि ‘स्वस्थ भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए हर नागरिक तक सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाई जा सकें।

