कांग्रेस जिलाध्यक्ष यू.डी. मिंज ने मितानिन कार्यक्रम के तहत कार्यरत मॉनिटरिंग स्टाफ को पिछले पांच महीनों से वेतन न मिलने पर साय सरकार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोल दिया है।
उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर गहरा कटाक्ष करते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक स्थिति है कि प्रदेश की बहनें दिवाली और होली जैसे बड़े त्योहार बिना वेतन के मनाने को मजबूर हुईं, जबकि सरकार विज्ञापनों के जरिए सुशासन का केवल खोखला ढिंढोरा पीट रही है।
मिंज ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की बदहाली का हवाला देते हुए इसे ‘श्रमिकों के पेट पर लात मारने वाली सरकार’ करार दिया और अधिकारियों की संवेदनहीनता पर भी कड़ा ऐतराज जताया। उनके अनुसार, जब महिला कर्मचारी अपना हक मांगने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के दफ्तर पहुंचीं, तो अधिकारियों का व्यवहार अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना रहा, जो भाजपा के महिला सम्मान के दावों की पोल खोलता है।
मिंज ने तकनीकी कारणों का हवाला देकर वेतन रोकने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब नेताओं के वेतन-भत्ते बढ़ाने होते हैं, तब ऐसी कोई दिक्कत क्यों नहीं आती। उन्होंने स्पष्ट किया कि 700 से अधिक मॉनिटरिंग स्टाफ की सैलरी को किसी निजी संस्था के भरोसे छोड़कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।
एक तरफ मुख्यमंत्री ‘महतारी वंदन’ की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ रात-दिन सेवा देने वाली मितानिन प्रशिक्षकों और समन्वयकों को सड़क पर बैठने के लिए विवश किया जा रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी मंगलवार तक पांच माह का रुका हुआ वेतन एकमुश्त जारी नहीं किया गया और बदतमीजी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस पार्टी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
उन्होंने यह मांग भी रखी कि वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया को निजी संस्था से हटाकर पूर्णतः सरकारी या एनएचएम के अधीन किया जाए।

