नई दिल्ली:
देश में होने वाली आगामी जनगणना का दूसरा चरण कई मायनों में ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण होने जा रहा है। मकान सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) के बाद अब दूसरे चरण में देशव्यापी जातिगत गणना कराने की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। वर्ष 1931 के बाद यह पहला अवसर होगा जब पूरे देश में एक साथ जातिगत आंकड़े जुटाए जाएंगे। इसी महीने आयोजित 15 दिवसीय पूर्व परीक्षण (प्री-ट्रायल) से मिले निष्कर्षों के आधार पर अब अंतिम प्रश्नावली तैयार की जा रही है।
प्री-ट्रायल में क्या परखा गया?
जातिगत जानकारी जुटाने की जटिल प्रक्रिया को समझने और उसकी व्यावहारिक चुनौतियों को परखने के लिए 6 जुलाई से 20 जुलाई के बीच देश स्तर पर प्री-ट्रायल कराया गया।
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बिना किसी पूर्व निर्धारित दायरे के प्रश्न: प्री-ट्रायल के दौरान आम नागरिकों को किसी तय श्रेणी या सीमित दायरे में बांधे बिना उनसे उनकी जाति और अन्य जानकारी पूछी गई।
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विरोधाभास और विविधता का आकलन: लोगों को स्वयं अपनी जाति बताने का विकल्प देने से बड़ी मात्रा में विविधतापूर्ण उत्तर और अलग-अलग जानकारियां प्राप्त हुई हैं।
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डेटा की सटीकता की चुनौती: खुद से बताई गई जातियों से मिलने वाले विरोधाभासी जवाबों के बीच शुद्ध और सटीक आंकड़े कैसे तैयार किए जाएं, अब प्री-ट्रायल के इन नतीजों पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मंथन किया जा रहा है।
यद्यपि इस बार डिजिटल डेटा और आधुनिक मानचित्र उपलब्ध होने से जनगणना कर्मियों को घर-घर पहुँचने में सहूलियत होगी, लेकिन जातिगत आंकड़ों का शुद्धिकरण अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
19 भाषाओं में तैयार हो रही 32 लाख मार्गदर्शिकाएं
जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए जनगणना महानिबंधक (रजिस्ट्रार जनरल) कार्यालय द्वारा व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण सामग्री तैयार की जा रही है:
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210 पृष्ठों की मार्गदर्शिका: 19 विभिन्न भाषाओं में कुल 32 लाख मार्गदर्शिकाएं छापी जा रही हैं।
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प्रशिक्षण एवं अधिकार: इनके माध्यम से फील्ड में तैनात होने वाले लाखों जनगणना कर्मियों को उनके कार्यों, अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और डेटा जुटाने की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
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डेटा की शुद्धता पर ज़ोर: कर्मियों को यह विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा कि फील्ड में काम करते समय आम नागरिकों के जवाबों को सही तरीके से कैसे दर्ज करें, ताकि आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता बनी रहे।
140 करोड़ से अधिक आबादी का सामाजिक-आर्थिक वर्गीकरण
भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा देश की 140 करोड़ से अधिक जनसंख्या के साथ-साथ उनकी जातिगत जानकारी का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
इन एकत्रित आंकड़ों को केवल संख्या तक सीमित न रखकर महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक मानकों के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। इससे देश को एक विश्वसनीय और अद्यतन जनसांख्यिकीय, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा प्रवासन संबंधी डेटा प्राप्त हो सकेगा, जो भविष्य की सरकारी नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।



