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नई दिल्ली:
सोचिए, अगर रात के अंधेरे में भी आपके शहर के ऊपर सूरज जैसा उजियारा हो और बिजली कभी गुल ही न हो? सुनने में यह किसी काल्पनिक विज्ञान (Science Fiction) फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन चीन ने इसे सच कर दिखाने की दिशा में एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए हैं!
धरती पर खुद का ‘कृत्रिम सूर्य’ (Artificial Sun) तैयार करने की दौड़ में चीन ने अब तक का सबसे बड़ा धमाका किया है। चीन ने दुनिया का सबसे विशाल और शक्तिशाली, 582 टन वजनी ‘सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट’ बनाकर उसका सफल परीक्षण कर लिया है।
आइए जानते हैं कि चीन की यह जादुई मशीन आखिर काम कैसे करेगी और इससे दुनिया कैसे बदलने वाली है!
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10 करोड़ डिग्री सेल्सियस की भट्ठी… और 582 टन का ‘सुपर-दैत्य’!
सूर्य के भीतर इतना ज्यादा तापमान और दबाव होता है कि वहां लगातार ऊर्जा का महा-विस्फोट होता रहता है। जब चीन ने धरती पर ऐसा ही सूरज बनाने की सोची, तो सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस तक उबलती हुई गैस (प्लाज्मा) को संभाला कैसे जाए? इतना तापमान तो दुनिया की किसी भी धातु या चट्टान को पलक झपकते ही भाप बना सकता है!
इसी ‘आग के गोले’ को काबू में रखने के लिए चीन ने 582 टन वजनी यह विशालकाय चुंबक बनाया है:
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जादुई अदृश्य पिंजरा: यह चुंबक एक इतना प्रचंड चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) पैदा करता है, जो उबलते हुए प्लाज्मा को हवा में ही टांगकर रखता है।
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रिएक्टर की सुरक्षा: यह खौलती हुई गैस को रिएक्टर की लोहे-कांच की दीवारों को छूने ही नहीं देता!
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असीमित और साफ बिजली: इस प्रक्रिया से जो ऊर्जा निकलेगी, उससे बिना कोई धुआं या प्रदूषण फैलाए पूरी दुनिया को सदियों तक मुफ्त जैसी बिजली दी जा सकेगी।
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कितना बड़ा है यह ‘महा-चुंबक’?
अगर आप इस चुंबक का आकार देखेंगे तो आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएंगी!
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आकार और वजन: यह विशालकाय ‘D’ आकार का चुंबक 21 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा है। इसका वजन 582 टन है, यानी करीब 100 विशालकाय हाथियों के बराबर!
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मिशन 2027: चीन का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 के अंत तक उसका यह ‘बर्निंग प्लाज्मा रिएक्टर’ पूरी तरह चालू हो जाए। इसके बाद 2030 तक इससे व्यावसायिक रूप से बिजली का उत्पादन शुरू करने का प्लान है।
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आखिर कैसे जलेगा धरती पर ‘नया सूरज’?
यह पूरा करिश्मा परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) तकनीक पर टिका हुआ है:
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दो परमाणुओं की टक्कर: इसमें हाइड्रोजन के दो छोटे और हल्के परमाणु आपस में टकराकर एक भारी परमाणु बनाते हैं।
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अथाह ऊर्जा का जन्म: जब ये परमाणु आपस में जुड़ते हैं, तो इनसे इतनी भयंकर ऊर्जा निकलती है जिसकी हम और आप कल्पना भी नहीं कर सकते।
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सूर्य का असली राज: अंतरिक्ष में चमकने वाला हमारा असली सूर्य भी ठीक इसी तकनीक से करोड़ों सालों से चमक रहा है। चीन अब इसी कुदरती करिश्मे को अपनी प्रयोगशाला में दोहरा रहा है!
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भारत का मास्टरस्ट्रोक और चीन से तगड़ा मुकाबला!
आपको यह जानकर गर्व होगा कि फ्रांस में दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन प्रोजेक्ट (ITER) चल रहा है, जिसमें भारत, चीन, अमेरिका, रूस, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे दिग्गज देश एक साथ काम कर रहे हैं।
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भारत का योगदान: इस ग्लोबल प्रोजेक्ट के सबसे खतरनाक और अहम हिस्से ‘क्रायोस्टैट’ (रिएक्टर को ठंडा और सुरक्षित रखने वाला विशाल कवच) को हमारे भारत ने ही बनाकर फ्रांस भेजा है!
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चीन क्यों मार रहा है बाजी?: फ्रांस का ग्लोबल प्रोजेक्ट सिर्फ एक टेस्ट (प्रयोग) है, उससे बिजली नहीं बेची जाएगी। लेकिन चीन ने जो यह नया 582 टन का चुंबक बनाया है, वह फ्रांस वाले चुंबक से भी 1.3 गुना बड़ा है! चीन का इरादा टेस्ट करने का नहीं, बल्कि सीधे बाजार में अपनी बिजली बेचने का है।
अगर चीन का यह दांव सफल रहा, तो आने वाले सालों में पेट्रोल, डीजल और कोयले की छुट्टी हो जाएगी और दुनिया को मिलेगा एक कभी न खत्म होने वाला ‘अमर ऊर्जा का स्रोत’!



