देशभर में आज सरकारी बैंकों के कामकाज पर बड़ा असर पड़ रहा है क्योंकि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने अपनी मांगों को लेकर देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल की सबसे खास बात यह है कि पिछले तीन दिनों से बैंक लगातार बंद थे, जिसमें महीने का चौथा शनिवार, रविवार और फिर गणतंत्र दिवस का अवकाश शामिल था। आज चौथे दिन जब बैंक खुलने की उम्मीद थी, तभी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इस हड़ताल का मुख्य कारण बैंकों में ‘5 डे वर्किंग’ यानी हफ्ते में पांच दिन काम करने के नियम को लागू कराना है। बैंक यूनियनों का तर्क है कि जब बीमा क्षेत्र और केंद्र सरकार के अन्य कार्यालयों में यह व्यवस्था लागू है, तो इसे बैंकों में भी तुरंत प्रभाव से अमल में लाना चाहिए।
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इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं पर दिखाई दे रहा है, जहाँ पैसे जमा करने, निकालने और चेक क्लियरिंग जैसे प्रशासनिक काम पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक जैसे निजी क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी इस यूनियन का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए वहां कामकाज सामान्य रूप से चलने की संभावना है। डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहेंगी, लेकिन लगातार छुट्टियों और हड़ताल के कारण एटीएम में नकदी की किल्लत हो सकती है क्योंकि ब्रांच बंद होने से वहां कैश रिफिलिंग में देरी हो रही है।
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यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के बीच पिछले समझौतों में शनिवार की छुट्टी पर सहमति तो बनी थी, लेकिन अभी तक इसे आधिकारिक आदेश के रूप में जारी नहीं किया गया है। बैंककर्मी इस छुट्टी के बदले रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को भी तैयार हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस आश्वासन न मिलने के कारण उन्हें इस हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा। 23 जनवरी को हुई सुलह की बैठक बेनतीजा रहने के बाद अब आम जनता को अपनी बैंकिंग जरूरतों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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