छत्तीसगढ़ और झारखंड में कुदरत ने इस बार ऐसा खेल दिखाया है कि कैलेंडर तो अप्रैल का है, लेकिन अहसास सीधे नवंबर वाला मिल रहा है। जिस वक्त आसमान से आग बरसती थी और लू के थपेड़े चलते थे, उस वक्त राजधानी समेत पूरे प्रदेश में रिमझिम बारिश ने मौसम का कायापलट कर दिया है।
पिछले 24 घंटों के भीतर मौसम के इस बदले मिजाज ने पारा ऐसा गिराया कि अधिकतम तापमान सीधे साढ़े सात डिग्री का गोता लगाकर 27 डिग्री सेल्सियस पर जा टिका है। यह सब कुछ एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और निचले क्षोभमंडल में बने चक्रवाती घेरे की वजह से हुआ है, जिसने पूरे इलाके को किसी हिल स्टेशन की तरह ठंडा कर दिया है।
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मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों तक का हाल यह है कि लोग अब सूरज निकलने पर छांव नहीं, बल्कि धूप तलाश रहे हैं। सुबह-सुबह लोग घरों के बाहर धूप सेंकते नजर आते हैं, दोपहर में रुक-रुककर हो रही बारिश चाय-पकौड़ों की याद दिला रही है, और शाम ढलते ही जैकेट की जरूरत महसूस होने लगती है। रात होते-होते ठंड का अहसास इतना बढ़ गया है कि जिन कूलर और पंखों की सर्विसिंग पिछले हफ्ते ही हुई थी, वे अब पूरी तरह बंद पड़े हैं और लोगों ने अलमारी के किसी कोने में दबाकर रखे गए कंबल दोबारा निकाल लिए हैं।
खासकर छत्तीसगढ़ के पहाड़ी इलाकों जैसे जशपुर मैनपाट सामरी पाठ और झारखंड के ऊंचाई वाले स्थानों जैसे नेतरहाट में तो नजारा बिल्कुल अलग ही है। वहां हुई ओलावृष्टि ने धरती पर सफेद चादर बिछा दी है, जिससे ऐसा लग रहा है मानो ठंड का मौसम वापस लौट आया हो। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि यह ‘कूल-कुल’ वाला अहसास सिर्फ शुक्रवार तक ही रहने वाला है, क्योंकि इसके बाद मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाएगा और सूरज देवता फिर से अपनी असली गर्मी दिखाना शुरू करेंगे। फिलहाल जनता इस बेमौसम ठंड का भरपूर मजा ले रही है, क्योंकि अप्रैल में नवंबर का ऐसा लुत्फ दशकों में कभी-कभी ही मिलता है।
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