NH पर सफर होगा महंगा और 1 अप्रैल से 5 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा टोल टैक्स
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए आयकर कानून का सबसे बड़ा लाभ इसकी सरलता में छिपा है। दशकों से चले आ रहे ‘प्रीवियस ईयर’ (पिछला वर्ष) और ‘असेसमेंट ईयर’ (कर निर्धारण वर्ष) के तकनीकी शब्दों ने आम करदाताओं को हमेशा उलझाए रखा था। अब नई व्यवस्था में इन दोनों को समाप्त कर सीधा ‘टैक्स ईयर’ शब्द का उपयोग किया जाएगा। इससे कर गणना और रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया सामान्य व्यक्ति के लिए अधिक स्पष्ट और समझने योग्य हो जाएगी।
नियमों का सरलीकरण और डिजिटल तकनीक
पुराने कानून में हजारों धाराएं और उप-धाराएं थीं, जिनमें समय-समय पर हुए संशोधनों ने इसे काफी जटिल बना दिया था। नए अधिनियम 2025 में इन धाराओं को युक्तिसंगत बनाया गया है। सरकार का लक्ष्य पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और ‘फेसलेस’ (बिना मानवीय हस्तक्षेप) बनाना है। इससे न केवल कर चोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि ईमानदार करदाताओं को स्क्रूटनी और नोटिस के डर से भी मुक्ति मिलेगी।
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मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा को राहत
इस नए कानून के साथ ही सरकार ने 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया है। इसके अलावा, पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलने वाले भत्तों जैसे शिक्षा और हॉस्टल भत्ते में भारी बढ़ोतरी की गई है। एचआरए (HRA) की गणना के लिए नए शहरों को टियर-1 में शामिल करना भी इसी सरलीकरण का हिस्सा है, ताकि अधिक से अधिक लोग बिना किसी सीए (CA) की मदद के अपना टैक्स खुद प्लान कर सकें।
क्या वाकई आसान होगी प्रक्रिया?
विशेषज्ञों का मानना है कि नए कानून में भाषा को सरल रखा गया है और पुराने विवादित प्रावधानों को हटा दिया गया है। ‘जीएसटी 2.0’ और ‘आयकर अधिनियम 2025’ का समन्वय अर्थव्यवस्था को एक ऐसे ढांचे में ले जाएगा जहाँ डेटा शेयरिंग आसान होगी। इससे करदाताओं को बार-बार एक ही जानकारी अलग-अलग विभागों को नहीं देनी होगी। कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से शुरू हो रहा यह नया दौर भारतीय कर प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जन-हितैषी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।



