देश के 99 प्रतिशत से अधिक गांवों के पांच किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध हैं बैंकिंग सुविधाएं
भारत सरकार के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शहरी बेघरों को सभी मौसमों में सुरक्षित और स्थायी आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई गई योजना के महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन अर्थात डीएवाई एनयूएलएम के एक प्रमुख घटक के रूप में शहरी बेघरों के लिए आश्रय (एसयूएच) योजना का संचालन किया गया। इस मिशन के तहत देश के 981 शहरों और कस्बों में कुल 1995 आश्रय स्थल निर्मित किए गए हैं जो अब बेघर व्यक्तियों के पुनर्वास में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार भूमि और उपनिवेशन राज्य के विषय होने के नाते बेघर व्यक्तियों के पुनर्वास की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की है। हालांकि केंद्र सरकार ने विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाबद्ध कार्यकलापों के माध्यम से इन प्रयासों में निरंतर सहायता प्रदान की है। निर्मित किए गए इन आश्रय स्थलों में मानवीय गरिमा के साथ जीवन यापन के लिए पानी स्वच्छता बिजली रसोईघर और सामान्य मनोरंजन स्थान जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य रूप से प्रदान की गई हैं।
मिशन की अवधि 30 सितंबर 2024 को आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुकी है लेकिन इसके तहत बनाई गई व्यवस्थाएं अब भी प्रभावी हैं। योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रत्येक आश्रय स्तर पर दिन प्रतिदिन के पर्यवेक्षण और तत्काल शिकायत निवारण के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की आश्रय प्रबंधन समिति (SMC) को प्राथमिक निकाय के रूप में जिम्मेदार बनाया गया है। यह समिति यह सुनिश्चित करती है कि आश्रय स्थलों में रहने वाले व्यक्तियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं मिलती रहें।
इन आश्रय स्थलों के निर्माण से शहरी क्षेत्रों में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हजारों परिवारों को एक सुरक्षित छत मिली है। केंद्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकारों के क्रियान्वयन से शुरू हुई यह पहल शहरी गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम साबित हुई है।



