1 फरवरी से सिगरेट पर बढ़ेगा टैक्स, केंद्र सरकार ने लागू की नई एक्साइज ड्यूटी
साल 2026 की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की ज़िंदगी से जुड़े कई अहम नियम बदल चुके हैं। 31 दिसंबर 2025 केवल साल का आखिरी दिन नहीं था, बल्कि कई जरूरी आर्थिक और प्रशासनिक फैसलों की समय-सीमा भी यहीं खत्म हुई। 1 जनवरी 2026 से बैंकिंग, टैक्सेशन, डिजिटल पेमेंट, निवेश और ऊर्जा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा।
नए साल के साथ सबसे बड़ा बदलाव क्रेडिट स्कोर को लेकर हुआ है। अब तक क्रेडिट स्कोर महीने में एक बार अपडेट होता था, लेकिन अब यह हर हफ्ते अपडेट किया जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई व्यक्ति ईएमआई या क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर नहीं करता है, तो उसका असर तुरंत उसके क्रेडिट स्कोर पर दिखाई देगा। वहीं, जो लोग समय पर भुगतान करते हैं, उन्हें इसका फायदा मिलेगा और भविष्य में लोन लेना आसान हो जाएगा।
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छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए भी नया साल अहम साबित हो सकता है। रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में रेपो रेट में कटौती के बाद संकेत मिल रहे हैं कि सरकार पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना और एनएससी जैसी योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव कर सकती है। ऐसे में जिन लोगों ने 31 दिसंबर से पहले निवेश कर लिया है, उन्हें पुरानी दरों का लाभ मिलेगा, जबकि आगे निवेश करने वालों को कम ब्याज मिल सकता है।
इनकम टैक्स से जुड़े मामलों में भी 31 दिसंबर की तारीख बेहद अहम रही। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जिन लोगों ने अब तक इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया था, उनके लिए अब सामान्य रिटर्न का रास्ता बंद हो चुका है। अब केवल अपडेटेड रिटर्न का विकल्प बचा है, जिसमें भारी जुर्माना देना होगा। देरी के आधार पर टैक्स पर 25 प्रतिशत से लेकर 70 प्रतिशत तक अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ सकती है। साथ ही टैक्स रिफंड का लाभ भी नहीं मिलेगा।
डिजिटल लेनदेन करने वालों के लिए भी नए साल से नियम सख्त कर दिए गए हैं। बढ़ते साइबर फ्रॉड को देखते हुए सरकार ने यूपीआई प्लेटफॉर्म पर केवाईसी और मोबाइल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया और मजबूत कर दी है। अब बिना पूरी जांच के डिजिटल भुगतान करना मुश्किल होगा। इससे फर्जी खातों और धोखाधड़ी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
पैन और आधार लिंकिंग को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। जिन लोगों ने अब तक पैन को आधार से लिंक नहीं कराया है, उनका पैन निष्क्रिय हो सकता है। ऐसे में न तो वे टैक्स रिटर्न दाखिल कर पाएंगे और न ही बैंकिंग या निवेश से जुड़े काम आसानी से कर सकेंगे।
ईंधन और रसोई गैस की कीमतों को लेकर भी 1 जनवरी से बदलाव देखने को मिल सकता है। हर महीने की तरह इस बार भी एलपीजी सिलेंडर, सीएनजी और एविएशन फ्यूल की कीमतों की समीक्षा की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर आम लोगों के घरेलू बजट पर असर पड़ सकता है।
हर अंत एक नई शुरुआत है -बस देखने का नजरिया चाहिए…….( फ़ैज़ान अशरफ़)
इसके साथ ही सरकार ने संकेत दिए हैं कि अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स कानून लागू किया जाएगा। यह कानून पुराने 1961 के आयकर अधिनियम की जगह लेगा और टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने के साथ-साथ विवादों को कम करने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
ऊर्जा संरक्षण को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। अब फ्रिज, टीवी, एलपीजी स्टोव और चिलर जैसे कई घरेलू उपकरणों पर स्टार रेटिंग अनिवार्य कर दी गई है। बिना स्टार लेबल वाले उपकरणों की बिक्री पर रोक होगी। इससे न केवल बिजली की खपत कम होगी बल्कि उपभोक्ताओं को भी लंबे समय में फायदा मिलेगा।
कुल मिलाकर नया साल सिर्फ तारीख का बदलाव नहीं है, बल्कि नियमों और जिम्मेदारियों का भी नया दौर लेकर आया है। बैंकिंग से लेकर टैक्स और डिजिटल लेनदेन तक हुए ये बदलाव सीधे आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित करेंगे। ऐसे में जरूरी है कि लोग समय रहते इन नियमों को समझें और अपने जरूरी काम पूरे कर लें, ताकि आगे किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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