दुनिया के 49वें नए ब्लड ग्रुप जामा की खोज, ब्रिटेन और इस्राइल के वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता
नई दिल्ली/लंदन: मेडिकल साइंस की दुनिया में एक ऐतिहासिक खोज हुई है। ब्रिटेन की एनएचएस ब्लड एंड ट्रांसप्लांट और इस्राइल के शीर्ष अस्पतालों के वैज्ञानिकों के एक संयुक्त शोध दल ने जामा नामक एक बिल्कुल नए ब्लड ग्रुप की खोज की है। अंतरराष्ट्रीय सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन ने इसे मानव शरीर के 49वें ब्लड ग्रुप सिस्टम के रूप में आधिकारिक मान्यता दे दी है।
क्या है जामा ब्लड ग्रुप?
मानव शरीर में एफ-11 आर नामक एक विशिष्ट जीन पाया जाता है, जो जंक्शनल अधेशन मॉलिक्युल-ए प्रोटीन का निर्माण करता है। इसी प्रोटीन के नाम पर इस नए ब्लड ग्रुप का नाम जामा रखा गया है। वैज्ञानिकों ने एफ-11 आर जीन और इस प्रोटीन के सटीक डीएनए म्यूटेशन की पूरी जेनेटिक और सेरोलॉजिकल मैपिंग कर इसके वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत किए हैं।
कैसे हुई इस दुर्लभ ब्लड ग्रुप की खोज?
इस्राइल और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक इस्राइली महिला मरीज और उनके भाई के रक्त प्लाज्मा में एक दुर्लभ एंटीबॉडी का अध्ययन करके इस नए ब्लड ग्रुप का पता लगाया। जांच में सामने आया कि मरीज और उनके भाई में एक विशिष्ट एफ-11 आर जीन मौजूद था, जबकि उनमें सामान्य एंटीजन अनुपस्थित थे। इस दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति वाले लोग जब किसी एंटीजन के संपर्क में आते हैं, तो वे एक विशेष एंटीबॉडी का निर्माण करते हैं, जो लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स दोनों से संलग्न हो सकती है।
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चिकित्सा जगत को मिलेंगे ये बड़े लाभ
इस खोज से भविष्य में उन मरीजों के सटीक इलाज और मेडिकल मैनेजमेंट में मदद मिलेगी, जिनमें लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स दोनों को प्रभावित करने वाली एंटीबॉडीज समस्याएं पैदा करती हैं। जामा ब्लड ग्रुप सिस्टम में एक ही हाई-प्रीवलेंस एंटीजन शामिल है, जिसका मतलब है कि यह एंटीजन दुनिया के लगभग सभी व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की सतह पर सामान्य रूप से मौजूद होता है।

