नई दिल्ली | 26 मार्च 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज मध्यम और छोटे शहरों के लिए हवाई संपर्क (Air Connectivity) के एक नए युग का आगाज कर दिया है। सरकार ने 28,840 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ ‘क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना – संशोधित उड़ान’ के शुभारंभ को मंजूरी दे दी है। अगले दस वर्षों (2026-27 से 2035-36) के लिए लागू होने वाली इस योजना का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ, पहाड़ी और द्वीपीय क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ना है। इस फैसले से न केवल आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा सस्ती होगी, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में व्यापार, पर्यटन और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार आएगा।
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योजना के मास्टर स्ट्रोक: क्या-क्या बदलेगा?
1. 100 नए हवाई अड्डों का विकास:
विकसित भारत 2047 के विजन को ध्यान में रखते हुए, सरकार अगले आठ वर्षों में 12,159 करोड़ रुपये खर्च करके 100 नए हवाई अड्डों का विकास करेगी। ये हवाई अड्डे उन क्षेत्रों में बनाए जाएंगे जहाँ वर्तमान में हवाई पट्टियां तो हैं लेकिन वहां से उड़ानें संचालित नहीं हो रही हैं।
2. 200 आधुनिक हेलीपैड और एयर एम्बुलेंस को मजबूती:
पहाड़ी और दुर्गम इलाकों की चुनौतियों को देखते हुए 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रति हेलीपैड 15 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी। इससे न केवल अंतिम-मील कनेक्टिविटी (Last-mile connectivity) सुधरेगी, बल्कि संकट के समय मरीजों को एयर एम्बुलेंस की सुविधा भी तेजी से मिल सकेगी।
3. एयरलाइंस को 10,000 करोड़ की बड़ी मदद:
छोटे शहरों से उड़ान भरना घाटे का सौदा न रहे, इसके लिए सरकार ने ‘विजिबिलिटी फंड’ (VGF) के रूप में एयरलाइन संचालकों को 10 वर्षों में 10,043 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव रखा है। इससे टिकट की कीमतें कम रखने में मदद मिलेगी।
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आत्मनिर्भर भारत: अब ‘देसी’ विमानों का होगा जलवा
इस योजना के तहत स्वदेशी एयरोस्पेस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पवन हंस के लिए दो HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए दो HAL डोर्नियर विमान खरीदे जाएंगे। यह कदम विमान अधिग्रहण के मामले में भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाएगा।
उड़ान का अब तक का सफर:
अक्टूबर 2016 में शुरू हुई मूल उड़ान योजना ने अब तक देश की तस्वीर बदल दी है। 28 फरवरी 2026 तक देश में 95 हवाई अड्डों और हेलीपोर्टों पर 663 मार्गों को चालू किया जा चुका है। अब तक लगभग 1.62 करोड़ यात्रियों ने इस योजना का लाभ उठाकर आसमान की ऊंचाइयों को छुआ है। अब संशोधित योजना के जरिए सरकार इस सफलता को अगले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है।

